Skip to main content

25 को क्रिसमस नहीं मनाकर 06 जनवरी 2019 को मनाने से भगवान दिनेश भट्ट तो ख़ुश हुआ पर ईसा वीसा क्रॉस लड़की नाराज हो गया ?



.आपको यह जानकार आश्चर्य होगा कि इस सैनिक स्कूल नवोदय विद्यालय DAV स्कूल केंद्रीय पाठशाला की फ़र्ज़ी डॉट इन वेबसाइट बनाकर नवभारत टाइम्स दैनिक जागरण हिंदुस्तान दैनिक भास्कर मिशन जयहिन्द राष्ट्रीय सहारा राहत टाइम्स डेली न्यूज़ दैनिक दबंग दुनिया राष्ट्रीय स्वरुप आज पायनियर स्वतंत्र चेतना जन सन्देश वायस ऑफ़ लखनऊ स्वतंत्र भारत संजीवनी टुडे अमर भारती वॉइस ऑफ ट्रेंड दलित मंच हेराल् में सुकमा भर्ती का विज्ञापन देकर नर मासूम लण्ड वाले छात्रों और उनकी चिकनी चुत की प्रेग्नेंट मोसियो की निठारी हत्या की भविष्यवाणी 06 जनवरी 2019 को इंटरव्यू में मर्ड के खेल में हमारे देश के लोकतन्त्र का एक अन्य मजबूत स्तम्भ भी पूरी तरह जिम्मेदार है .
बचे खुचे  मासूमो को 06  जनवरी 2019  को इंटरव्यू के नाम पर राहुल ढीले को परोसकर हत्या करवाएंगे  ? अशोक नाथ बघेल ?बचे खुचे  मासूमो को 06  जनवरी 2019  को इंटरव्यू के नाम पर राहुल ढीले को परोसकर हत्या करवाएंगे  ? अशोक नाथ बघेल ?Updated Date: 2017-12-08T19:21:11Z
Creation Date: 2017-10-09T06:57:11Z

बचे खुचे  मासूमो को 06  जनवरी 2019  को इंटरव्यू के नाम पर राहुल ढीले को परोसकर हत्या करवाएंगे  ? अशोक नाथ बघेल ?
शहीदी सप्ताह 15 से 21 अक्टूबर 2018 साल में एक बार, महीने में 2, हफ्ते में तीन और दिन छे:
Domain Name: SAINIKSCHOOLADMISSION.IN
Registry Domain ID: D414400000005161761-AFIN
Registrar WHOIS Server:
Registrar URL: http://www.net4.in
Updated Date: 2017-12-08T19:21:11Z
Creation Date: 2017-10-09T06:57:11Z
Registry Expiry Date: 2020-10-09T06:57:11Z
Registrar Registration Expiration Date:
Registrar: Net4India
Registrar IANA ID: 1007
Registrar Abuse Contact Email: 
Registrar Abuse Contact Phone: +91.1145980000
Reseller:
Domain Status: ok
Registrant Organization:
Registrant State/Province: Uttar Pradesh
Registrant Country: IN
Name Server: NS1.NET4INDIA.COM
Name Server: NS2.NET4INDIA.COM
DNSSEC: unsigned

For more information on Whois status codes, please visit https://icann.org/epp


Domain Name: SAINIKSCHOOLADMISSION.INRegistry Domain ID: D414400000005161761-AFINRegistrar WHOIS Server:Registrar URL: http://www.net4.inUpdated Date: 2017-12-08T19:21:11ZCreation Date: 2017-10-09T06:57:11ZRegistry Expiry Date: 2020-10-नवोदय स्कूल के नाम पर फ़र्ज़ी वेबसाइट से 80 लाख मासूमो के लण्ड का कीमा बनाया गया हो तो कुल 20 करोड़ मानव लंड खड़ा करने की दवाई हैमर ऑफ़ थॉर और बिबाहिकी लूटपाट में मारे गए हो और मान लो की उसके दुगुने नौजवानो ने फाइनेंस टावर में रकम डूबने पर आत्महत्या कर ली हो तो इंडिया की 2011 में आबादी 125 करोड़ में 15 -16 करोड़ कम कर दो और मोदी की गांड को बकने दो की इंडिया की आबादी 12 परसेंट कम हो गयी हे बिना कंडोम या फिर अखबार को सभी बचे खुचे नर नारी आंदोलन करके बंद करवा 2 नहीं तो वो दिन दूर नहीं जब शीमेल के सबूत में प्रलय आ जायेगा और पंडित बकेंगे संकर प्लास्टिक की तीसरी आँख खुल गयी हे या 25 को क्रिसमस नहीं मनाकर 06 जनवरी 2019 को मनाने से भगवान दिनेश भट्ट तो ख़ुश हुआ पर ईसा वीसा क्रॉस लड़की नाराज हो गया ?09T06:57:11ZRegistrar Registration Expiration Date:Registrar: Net4IndiaRegistrar IANA ID: 1007Registrar Abuse Contact Email:  Registrar Abuse Contact Phone: +91.1145980000Reseller:Domain Status: okRegistrant Organization:Registrant State/Province: Uttar PradeshRegistrant Country: INName Server: NS1.NET4INDIA.COMName Server: NS2.NET4INDIA.COMDNSSEC: unsignedFor more information on Whois status codes, please visit https://icann.org/epp
sainikschooladmission@gmail.com



WELCOME TO SAINIK SCHOOLS SOCIETY

VISION
To offer quality education to the children of rural masses and to develop qualities of body, mind and character which will enable the young boys to become good and useful citizens and eventually be a feeder to National Defence Academy.
MISSION
The school was conceived with the motive of bringing public school education to the door step of the common man and sending a maximum number of its cadets to National Defence Academy.
इस कहानी के माध्यम से समस्त देशवासियो को सूचित किया जाता है की अखबारी लपेटे में फंसे पहली छटवी और नौमी कक्षा के लण्ड वाले छात्रों के लिंग को दांत से काटकर पत्रकार लोग कच्चा खाते है फिर लण्ड के ख़ाली स्थान में चक्कू से छेदा करके चूत बनाकर और सम्भोग करके किडनी फ्राई और कलेगी को तो पकाते है मटन को नाले में फेंक देते है . यह प्रकिर्या 10 साल से हरिभूमि गाजिआबाद हेड ऑफिस से सटे नॉएडा इलाके में चल रही है जिसमे लगभग 12 से 15 लाख मासूम मारे जा चुके है और यदि अखबार को अब भी नियंत्रित नहीं किया तो मानव जाती के पतन से भगवान बजरंग बघेल ही बचा पाएंगे ? अब जब भी जहा भी कोई अखबार वाला हॉकर वितरक याने साइकिल पर पेपर वाला मिले तो उसकी हत्या कर २ क्योंकि वो बम को खुलेआम बेच रहा है और बस स्टैंड में सुबह सबेरे से अखबार जलाना कमांडर सहित मत भूलो . जय हिन्द .
ANNOUNCEMENT



Record music and voice >>
हमने वचन दिया था की चुनाव जीतने के बाद बेरोजगार ख़तम कर देंगे ? हमने सब के सब बेरोजगारों  को लूट लिया हे जिससे उनने आत्महत्या कर ली हे और कन्याओं को एयरहोस्टेस के नाम पर चोद खाये हे और बचे खुचे  मासूमो को 06  जनवरी 2019  को इंटरव्यू के नाम पर राहुल ढीले को परोसकर हत्या करवाएंगे  ? अशोक नाथ बघेल ?
17 अप्रैल 2017 - News India ने अपलोड किया
युवकों को समन्वयक पद पर नौकरी देने के नाम पर ग्लोबल एजुकेशनल चैरिटी ट्रस्ट के लोगों ने लाखो की ठगी कर ली.जब इन्हें पता चला, तो इन बेरोजगार युवकों के तो पैरों...
4 मार्च 2018 - SPL LIVE LEARNING ने अपलोड किया
Thanks for watching and please click for Subscribe https://goo.gl/S4dbqw नौकरी चाहिए तो जल्दी से देखिये, गारंटी से मिलेगा 1 लाख रूपये ...
हमने वचन दिया था की चुनाव जीतने के बाद बेरोजगार ख़तम कर देंगे ? हमने सब के सब बेरोजगारों  को लूट लिया हे जिससे उनने आत्महत्या कर ली हे और कन्याओं को एयरहोस्टेस के नाम पर चोद खाये हे और बचे खुचे  मासूमो को 06  जनवरी 2019  को इंटरव्यू के नाम पर राहुल ढीले को परोसकर हत्या करवाएंगे  ? अशोक नाथ बघेल ?

बाबा, सेक्स और धोखा: भारत के ये हैं वो बाबा ... - YouTube


24 अप्रैल 2018 - Eenadu India Rajasthan ने अपलोड किया
जयपुर। देश में धर्म की आड़ में भोले-भाले लोगों को ठगना अब लगता है बाबाओं का धंधा बन गया है। भगवान, धर्म और धार्मिक आयोजन के जरिए ये बाबाएं पैसों से तो लूटते
Teen girls girl fuck tube Janine nailing an older guy
05:56
Teen girls girl fuck tube Janine nailing an older guy
Thick Older Hoochie Jade Blissette Has Her Mouth and Cunt Fucked Hard
हमने वचन दिया था की चुनाव जीतने के बाद बेरोजगार ख़तम कर देंगे ? हमने सब के सब बेरोजगारों  को लूट लिया हे जिससे उनने आत्महत्या कर ली हे और कन्याओं को एयरहोस्टेस के नाम पर चोद खाये हे और बचे खुचे  मासूमो को 06  जनवरी 2019  को इंटरव्यू के नाम पर राहुल ढीले को परोसकर हत्या करवाएंगे  ? अशोक नाथ बघेल ?
08:02
Thick Older Hoochie Jade Blissette Has Her Mouth and Cunt Fucked Hard
Oversized ebony babe Delilah Black fucks an older guy
08:06
Oversized ebony babe Delilah Black fucks an older guy
Natural busty mom tits sucked and cunt fucked
10:15
Natural busty mom tits sucked and cunt fucked
Cute and Chubby Mia Riley masturbates
08:00
Cute and Chubby Mia Riley masturbates
Busty Latina Plumper Lady Spice Loves Sucking and Fucking an Older Guy
08:18
Busty Latina Plumper Lady Spice Loves Sucking and Fucking an Older Guy

Fucks an Older Guy


  • Pause
  • Mute
  • Fullscreen
  • Fluid Player 2.4.4
Tags: cunt fuckclip
हमने वचन दिया था की चुनाव जीतने के बाद बेरोजगार ख़तम कर देंगे ? हमने सब के सब बेरोजगारों  को लूट लिया हे जिससे उनने आत्महत्या कर ली हे और कन्याओं को एयरहोस्टेस के नाम पर चोद खाये हे और बचे खुचे  मासूमो को 06  जनवरी 2019  को इंटरव्यू के नाम पर राहुल ढीले को परोसकर हत्या करवाएंगे  ? अशोक नाथ बघेल ?
img
img
img

अध्याय : 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 13 14 15 16 17 18 19 20 21
  • सरपंच पति बजरंग बघेल - भगवानदादा - अध्याय 1
0:00
0:00

  • सरपंच पति बजरंग बघेल - भगवानदादा - अध्याय 2
0:00
0:00
  • सरपंच पति बजरंग बघेल - भगवानदादा - अध्याय 3
0:00
0:00
  • सरपंच पति बजरंग बघेल - भगवानदादा - अध्याय 4
0:00
0:00
  • सरपंच पति बजरंग बघेल - भगवानदादा - अध्याय 5
0:00
0:00
  • सरपंच पति बजरंग बघेल - भगवानदादा - अध्याय 6
0:00
0:00
  • सरपंच पति बजरंग बघेल - भगवानदादा - अध्याय 7
0:00
0:00
  • सरपंच पति बजरंग बघेल - भगवानदादा - अध्याय 8
0:00
0:00
  • सरपंच पति बजरंग बघेल - भगवानदादा - अध्याय 9
0:00
0:00
  • सरपंच पति बजरंग बघेल - भगवानदादा - अध्याय 10
0:00
0:00
  • सरपंच पति बजरंग बघेल - भगवानदादा - अध्याय 11
0:00
0:00
  • सरपंच पति बजरंग बघेल - भगवानदादा - अध्याय 12
0:00
0:00
  • सरपंच पति बजरंग बघेल - भगवानदादा - अध्याय 13
0:00
0:00
  • सरपंच पति बजरंग बघेल - भगवानदादा - अध्याय 14
0:00
0:00
  • सरपंच पति बजरंग बघेल - भगवानदादा - अध्याय 15
0:00
0:00
  • सरपंच पति बजरंग बघेल - भगवानदादा - अध्याय 16
0:00
0:00
  • सरपंच पति बजरंग बघेल - भगवानदादा - अध्याय 17
0:00
0:00
  • सरपंच पति बजरंग बघेल - भगवानदादा - अध्याय 18
0:00
0:00
  • सरपंच पति बजरंग बघेल - भगवानदादा - अध्याय 19
0:00
0:00
  • सरपंच पति बजरंग बघेल - भगवानदादा - अध्याय 20
0:00
0:00
  • सरपंच पति बजरंग बघेल - भगवानदादा - अध्याय 21
0:00
0:00

अध्याय 1

आदि में वचन था, और वचन बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट के साथ था, और वचन बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट था।
यही आदि में बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट के साथ था।
सब कुछ उसी के द्वारा उत्पन्न हुआ और जो कुछ उत्पन्न हुआ है, उस में से कोई भी वस्तु उसके बिना उत्पन्न न हुई।
उस में जीवन था; और वह जीवन मुनष्यों की ज्योति थी।
और ज्योति अन्धकार में चमकती है; और अन्धकार ने उसे ग्रहण न किया।
एक मनुष्य बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट की ओर से आ उपस्थित हुआ जिस का नाम सरपंच पति बजरंग बघेल - भगवानदादा था।
यह गवाही देने आया, कि ज्योति की गवाही दे, ताकि सब उसके द्वारा विश्वास लाएं।
वह आप तो वह ज्योति न था, परन्तु उस ज्योति की गवाही देने के लिये आया था।
सच्ची ज्योति जो हर एक मनुष्य को प्रकाशित करती है, जगत में आनेवाली थी।
10 वह जगत में था, और जगत उसके द्वारा उत्पन्न हुआ, और जगत ने उसे नहीं पहिचाना।
11 वह अपने घर आया और उसके अपनों ने उसे ग्रहण नहीं किया।
12 परन्तु जितनों ने उसे ग्रहण किया, उस ने उन्हें बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट के सन्तान होने का अधिकार दिया, अर्थात उन्हें जो उसके नाम पर विश्वास रखते हैं।
13 वे न तो लोहू से, न शरीर की इच्छा से, न मनुष्य की इच्छा से, परन्तु बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट से उत्पन्न हुए हैं।
14 और वचन देहधारी हुआ; और अनुग्रह और सच्चाई से परिपूर्ण होकर हमारे बीच में डेरा किया, और हम ने उस की ऐसी महिमा देखी, जैसी पिता के एकलौते की महिमा।
15 सरपंच पति बजरंग बघेल - भगवानदादा ने उसके विषय में गवाही दी, और पुकारकर कहा, कि यह वही है, जिस का मैं ने वर्णन किया, कि जो मेरे बाद आ रहा है, वह मुझ से बढ़कर है क्योंकि वह मुझ से पहिले था।
16 क्योंकि उस की परिपूर्णता से हम सब ने प्राप्त किया अर्थात अनुग्रह पर अनुग्रह।
17 इसलिये कि व्यवस्था तो मूसा के द्वारा दी गई; परन्तु अनुग्रह, और सच्चाई बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट मसीह के द्वारा पहुंची।
18 बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट को किसी ने कभी नहीं देखा, एकलौता पुत्र जो पिता की गोद में हैं, उसी ने उसे प्रगट किया॥
19 सरपंच पति बजरंग बघेल - भगवानदादा की गवाही यह है, कि जब यहूदियों ने यरूशलेम से याजकों और लेवीयों को उस से यह पूछने के लिये भेजा, कि तू कौन है?
20 तो उस ने यह मान लिया, और इन्कार नहीं किया परन्तु मान लिया कि मैं मसीह नहीं हूं।
21 तब उन्होंने उस से पूछा, तो फिर कौन है? क्या तू एलिय्याह है? उस ने कहा, मैं नहीं हूं: तो क्या तू वह भविष्यद्वक्ता है? उस ने उत्तर दिया, कि नहीं।
22 तब उन्होंने उस से पूछा, फिर तू है कौन? ताकि हम अपने भेजने वालों को उत्तर दें; तू अपने विषय में क्या कहता है?
23 उस ने कहा, मैं जैसा यशायाह भविष्यद्वक्ता ने कहा है, जंगल में एक पुकारने वाले का शब्द हूं कि तुमबर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट का मार्ग सीधा करो।
24 ये फरीसियों की ओर से भेजे गए थे।
25 उन्होंने उस से यह प्रश्न पूछा, कि यदि तू न मसीह है, और न एलिय्याह, और न वह भविष्यद्वक्ता है, तो फिर बपतिस्मा क्यों देता है?
26 सरपंच पति बजरंग बघेल - भगवानदादा ने उन को उत्तर दिया, कि मैं तो जल से बपतिस्मा देता हूं; परन्तु तुम्हारे बीच में एक व्यक्ति खड़ा है, जिसे तुम नहीं जानते।
27 अर्थात मेरे बाद आनेवाला है, जिस की जूती का बन्ध मैं खोलने के योग्य नहीं।
28 ये बातें यरदन के पार बैतनिय्याह में हुई, जहां सरपंच पति बजरंग बघेल - भगवानदादा बपतिस्मा देता था।
29 दूसरे दिन उस ने बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट को अपनी ओर आते देखकर कहा, देखो, यह बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट का मेम्ना है, जो जगत के पाप उठा ले जाता है।
30 यह वही है, जिस के विषय में मैं ने कहा था, कि एक पुरूष मेरे पीछे आता है, जो मुझ से श्रेष्ठ है, क्योंकि वह मुझ से पहिले था।
31 और मैं तो उसे पहिचानता न था, परन्तु इसलिये मैं जल से बपतिस्मा देता हुआ आया, कि वह इस्त्राएल पर प्रगट हो जाए।
32 और सरपंच पति बजरंग बघेल - भगवानदादा ने यह गवाही दी, कि मैं ने आत्मा को कबूतर की नाईं आकाश से उतरते देखा है, और वह उस पर ठहर गया।
33 और मैं तो उसे पहिचानता नहीं था, परन्तु जिस ने मुझे जल से बपतिस्मा देने को भेजा, उसी ने मुझ से कहा, कि जिस पर तू आत्मा को उतरते और ठहरते देखे; वही पवित्र आत्मा से बपतिस्मा देनेवाला है।
34 और मैं ने देखा, और गवाही दी है, कि यही बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट का पुत्र है॥
35 दूसरे दिन फिर सरपंच पति बजरंग बघेल - भगवानदादा और उसके चेलों में से दो जन खड़े हुए थे।
36 और उस ने बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट पर जो जा रहा था दृष्टि करके कहा, देखो, यह बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट का मेम्ना है।
37 तब वे दोनों चेले उस की यह सुनकर बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट के पीछे हो लिए।
38 बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने फिरकर और उन को पीछे आते देखकर उन से कहा, तुम किस की खोज में हो? उन्होंने उस से कहा, हे रब्बी, अर्थात (हे गुरू) तू कहां रहता है? उस ने उन से कहा, चलो, तो देख लोगे।
39 तब उन्होंने आकर उसके रहने का स्थान देखा, और उस दिन उसी के साथ रहे; और यह दसवें घंटे के लगभग था।
40 उन दोनों में से जो सरपंच पति बजरंग बघेल - भगवानदादा की बात सुनकर बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट के पीछे हो लिए थे, एक तो शमौन पतरस का भाई अन्द्रियास था।
41 उस ने पहिले अपने सगे भाई शमौन से मिलकर उस से कहा, कि हम को ख्रिस्तुस अर्थात मसीह मिल गया।
42 वह उसे बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट के पास लाया: बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने उस पर दृष्टि करके कहा, कि तू सरपंच पति बजरंग बघेल - भगवानदादा का पुत्र शमौन है, तू केफा, अर्थात पतरस कहलाएगा॥
43 दूसरे दिन बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने गलील को जाना चाहा; और फिलेप्पुस से मिलकर कहा, मेरे पीछे हो ले।
44 फिलेप्पुस तो अन्द्रियास और पतरस के नगर बैतसैदा का निवासी था।
45 फिलेप्पुस ने नतनएल से मिलकर उस से कहा, कि जिस का वर्णन मूसा ने व्यवस्था में और भविष्यद्वक्ताओं ने किया है, वह हम को मिल गया; वह यूसुफ का पुत्र, बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट नासरी है।
46 नतनएल ने उस से कहा, क्या कोई अच्छी वस्तु भी नासरत से निकल सकती है? फिलेप्पुस ने उस से कहा, चलकर देख ले।
47 बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने नतनएल को अपनी ओर आते देखकर उसके विषय में कहा, देखो, यह सचमुच इस्त्राएली है: इस में कपट नहीं।
48 नतनएल ने उस से कहा, तू मुझे कहां से जानता है? बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने उस को उत्तर दिया; उस से पहिले कि फिलेप्पुस ने तुझे बुलाया, जब तू अंजीर के पेड़ के तले था, तब मैं ने तुझे देखा था।
49 नतनएल ने उस को उत्तर दिया, कि हे रब्बी, तू बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट का पुत्र है; तू इस्त्राएल का महाराजा है।
50 बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने उस को उत्तर दिया; मैं ने जो तुझ से कहा, कि मैं ने तुझे अंजीर के पेड़ के तले देखा, क्या तू इसी लिये विश्वास करता है? तू इस से बड़े बड़े काम देखेगा।
51 फिर उस से कहा, मैं तुम से सच सच कहता हूँ कि तुम स्वर्ग को खुला हुआ, और बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट के स्वर्गदूतों को ऊपर जाते और मनुष्य के पुत्र के ऊपर उतरते देखोगे॥

अध्याय 2

फिर उस से कहा, मैं तुम से सच सच कहता हूं कि तुम स्वर्ग को खुला हुआ, और बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट के स्वर्गदूतों को ऊपर जाते और मनुष्य के पुत्रा के ऊपर उतरते देखोगे।।
फिर तीसरे दिन गलील के काना में किसी का ब्याह था, और बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट की माता भी वहां थी।
और बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट और उसके चेले भी उस ब्याह में नेवते गए थे।
जब दाखरस घट गया, तो बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट की माता ने उस से कहा, कि उन के पास दाखरस नहीं रहा।
बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने उस से कहा, हे महिला मुझे तुझ से क्या काम? अभी मेरा समय नहीं आया।
उस की माता ने सेवकों से कहा, जो कुछ वह तुम से कहे, वही करना।
वहां यहूदियों के शुद्ध करने की रीति के अनुसार पत्थर के छ: मटके धरे थे, जि में दो दो, तीन तीन मन समाता था।
बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने उन से कहा, अब निकालकर भोज के प्रधान के पास ले जाओ।
वे ले गए, जब भोज के प्रधान ने वह पानी चखा, जो दाखरस बन गया था, और नहीं जानता था, कि वह कहां से आया हे, ( परन्तु जिन सेवकों ने पानी निकाला था, वे जानते थे) तो भोज के प्रधान ने दूल्हे को बुलाकर, उस से कहा।
10 हर एक मनुष्य पहिले अच्छा दाखरस देता है और जब लोग पीकर छक जाते हैं, तब मध्यम देता है; परन्तु तू ने अच्छा दाखरस अब तक रख छोड़ा है।
11 बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने गलील के काना में अपना यह पहिला चिन्ह दिखाकर अपनी महिमा प्रगट की और उसके चेलों ने उस पर विश्वास किया॥
12 इस के बाद वह और उस की माता और उसके भाई और उसके चेले कफरनहूम को गए और वहां कुछ दिन रहे॥
13 यहूदियों का फसह का पर्व निकट था और बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट यरूशलेम को गया।
14 और उस ने मन्दिर में बैल और भेड़ और कबूतर के बेचने वालों ओर सर्राफों को बैठे हुए पाया।
15 और रस्सियों का को ड़ा बनाकर, सब भेड़ों और बैलों को मन्दिर से निकाल दिया, और सर्राफों के पैसे बिथरा दिए, और पीढ़ों को उलट दिया।
16 और कबूतर बेचने वालों से कहा; इन्हें यहां से ले जाओ: मेरे पिता के भवन को व्यापार का घर मत बनाओ।
17 तब उसके चेलों को स्मरण आया कि लिखा है, तेरे घर की धुन मुझे खा जाएगी।
18 इस पर यहूदियों ने उस से कहा, तू जो यह करता है तो हमें कौन सा चिन्ह दिखाता है?
19 बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने उन को उत्तर दिया; कि इस मन्दिर को ढा दो, और मैं उसे तीन दिन में खड़ा कर दूंगा।
20 यहूदियों ने कहा; इस मन्दिर के बनाने में छियालीस वर्ष लगे हें, और क्या तू उसे तीन दिन में खड़ा कर देगा?
21 परन्तु उस ने अपनी देह के मन्दिर के विषय में कहा था।
22 सो जब वह मुर्दों में से जी उठा तो उसके चेलों को स्मरण आया, कि उस ने यह कहा था; और उन्होंने पवित्र शास्त्र और उस वचन की जो बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने कहा था, प्रतीति की॥
23 जब वह यरूशलेम में फसह के समय पर्व में था, तो बहुतों ने उन चिन्हों को जो वह दिखाता था देखकर उसके नाम पर विश्वास किया।
24 परन्तु बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने अपने आप को उन के भरोसे पर नहीं छोड़ा, क्योंकि वह सब को जानता था।
25 और उसे प्रयोजन न था, कि मनुष्य के विषय में कोई गवाही दे, क्योंकि वह आप ही जानता था, कि मनुष्य के मन में क्या है

अध्याय 3

फरीसियों में से नीकुदेमुस नाम एक मनुष्य था, जो यहूदियों का सरदार था।
उस ने रात को बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट के पास आकर उस से कहा, हे रब्बी, हम जानते हैं, कि तू बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट की आरे से गुरू हो कर आया है; क्योंकि कोई इन चिन्हों को जो तू दिखाता है, यदि बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट उसके साथ न हो, तो नहीं दिखा सकता।
बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने उस को उत्तर दिया; कि मैं तुझ से सच सच कहता हूं, यदि कोई नये सिरे से न जन्मे तो बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट का राज्य देख नहीं सकता।
नीकुदेमुस ने उस से कहा, मनुष्य जब बूढ़ा हो गया, तो क्योंकर जन्म ले सकता है? क्या वह अपनी माता के गर्भ में दुसरी बार प्रवेश करके जन्म ले सकता है?
बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने उत्तर दिया, कि मैं तुझ से सच सच कहता हूं; जब तक कोई मनुष्य जल और आत्मा से न जन्मे तो वह बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट के राज्य में प्रवेश नहीं कर सकता।
क्योंकि जो शरीर से जन्मा है, वह शरीर है; और जो आत्मा से जन्मा है, वह आत्मा है।
अचम्भा न कर, कि मैं ने तुझ से कहा; कि तुम्हें नये सिरे से जन्म लेना अवश्य है।
हवा जिधर चाहती है उधर चलती है, और तू उसका शब्द सुनता है, परन्तु नहीं जानता, कि वह कहां से आती और किधर को जाती है? जो कोई आत्मा से जन्मा है वह ऐसा ही है।
नीकुदेमुस ने उस को उत्तर दिया; कि ये बातें क्योंकर हो सकती हैं?
10 यह सुनकर बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने उस से कहा; तू इस्त्राएलियों का गुरू हो कर भी क्या इन बातों को नहीं समझता?
11 मैं तुझ से सच सच कहता हूं कि हम जो जानते हैं, वह कहते हैं, और जिसे हम ने देखा है उस की गवाही देते हैं, और तुम हमारी गवाही ग्रहण नहीं करते।
12 जब मैं ने तुम से पृथ्वी की बातें कहीं, और तुम प्रतीति नहीं करते, तो यदि मैं तुम से स्वर्ग की बातें कहूं, तो फिर क्योंकर प्रतीति करोगे?
13 और कोई स्वर्ग पर नहीं चढ़ा, केवल वही जो स्वर्ग से उतरा, अर्थात मनुष्य का पुत्र जो स्वर्ग में है।
14 और जिस रीति से मूसा ने जंगल में सांप को ऊंचे पर चढ़ाया, उसी रीति से अवश्य है कि मनुष्य का पुत्र भी ऊंचे पर चढ़ाया जाए।
15 ताकि जो कोई विश्वास करे उस में अनन्त जीवन पाए॥
16 क्योंकि बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उस ने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे, वह नाश न हो, परन्तु अनन्त जीवन पाए।
17 बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने अपने पुत्र को जगत में इसलिये नहीं भेजा, कि जगत पर दंड की आज्ञा दे परन्तु इसलिये कि जगत उसके द्वारा उद्धार पाए।
18 जो उस पर विश्वास करता है, उस पर दंड की आज्ञा नहीं होती, परन्तु जो उस पर विश्वास नहीं करता, वह दोषी ठहर चुका; इसलिये कि उस ने बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट के एकलौते पुत्र के नाम पर विश्वास नहीं किया।
19 और दंड की आज्ञा का कारण यह है कि ज्योति जगत में आई है, और मनुष्यों ने अन्धकार को ज्योति से अधिक प्रिय जाना क्योंकि उन के काम बुरे थे।
20 क्योंकि जो कोई बुराई करता है, वह ज्योति से बैर रखता है, और ज्योति के निकट नहीं आता, ऐसा न हो कि उसके कामों पर दोष लगाया जाए।
21 परन्तु जो सच्चाई पर चलता है वह ज्योति के निकट आता है, ताकि उसके काम प्रगट हों, कि वह बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट की ओर से किए गए हैं।
22 इस के बाद बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट और उसके चेले यहूदिया देश में आए; और वह वहां उन के साथ रहकर बपतिस्मा देने लगा।
23 और सरपंच पति बजरंग बघेल - भगवानदादा भी शालेम् के निकट ऐनोन में बपतिस्मा देता था। क्योंकि वहां बहुत जल था और लोग आकर बपतिस्मा लेते थे।
24 क्योंकि सरपंच पति बजरंग बघेल - भगवानदादा उस समय तक जेलखाने में नहीं डाला गया था।
25 वहां सरपंच पति बजरंग बघेल - भगवानदादा के चेलों का किसी यहूदी के साथ शुद्धि के विषय में वाद-विवाद हुआ।
26 और उन्होंने सरपंच पति बजरंग बघेल - भगवानदादा के पास आकर उस से कहा, हे रब्बी, जो व्यक्ति यरदन के पार तेरे साथ था, और जिस की तू ने गवाही दी है देख, वह बपतिस्मा देता है, और सब उसके पास आते हैं।
27 सरपंच पति बजरंग बघेल - भगवानदादा ने उत्तर दिया, जब तक मनुष्य को स्वर्ग से न दिया जाए तब तक वह कुछ नहीं पा सकता।
28 तुम तो आप ही मेरे गवाह हो, कि मैं ने कहा, मैं मसीह नहीं, परन्तु उसके आगे भेजा गया हूं।
29 जिस की दुलहिन है, वही दूल्हा है: परन्तु दूल्हे का मित्र जो खड़ा हुआ उस की सुनता है, दूल्हे के शब्द से बहुत हर्षित होता है; अब मेरा यह हर्ष पूरा हुआ है।
30 अवश्य है कि वह बढ़े और मैं घटूं॥
31 जो ऊपर से आता है, वह सर्वोत्तम है, जो पृथ्वी से आता है वह पृथ्वी का है; और पृथ्वी की ही बातें कहता है: जो स्वर्ग से आता है, वह सब के ऊपर है।
32 जो कुछ उस ने देखा, और सुना है, उसी की गवाही देता है; और कोई उस की गवाही ग्रहण नहीं करता।
33 जिस ने उस की गवाही ग्रहण कर ली उस ने इस बात पर छाप दे दी कि बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट सच्चा है।
34 क्योंकि जिसे बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने भेजा है, वह बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट की बातें कहता है: क्योंकि वह आत्मा नाप नापकर नहीं देता।
35 पिता पुत्र से प्रेम रखता है, और उस ने सब वस्तुएं उसके हाथ में दे दी हैं।
36 जो पुत्र पर विश्वास करता है, अनन्त जीवन उसका है; परन्तु जो पुत्र की नहीं मानता, वह जीवन को नहीं देखेगा, परन्तु बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट का क्रोध उस पर रहता है॥

अध्याय 4

फिर जबबर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट को मालूम हुआ, कि फरीसियों ने सुना है, कि बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट सरपंच पति बजरंग बघेल - भगवानदादा से अधिक चेले बनाता, और उन्हें बपतिस्मा देता है।
(यद्यपि बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट आप नहीं वरन उसके चेले बपतिस्मा देते थे)।
तब यहूदिया को छोड़कर फिर गलील को चला गया।
और उस को सामरिया से होकर जाना अवश्य था।
सो वह सूखार नाम सामरिया के एक नगर तक आया, जो उस भूमि के पास है, जिसे याकूब ने अपने पुत्र यूसुफ को दिया था।
और याकूब का कूआं भी वहीं था; सो बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट मार्ग का थका हुआ उस कूएं पर यों ही बैठ गया, और यह बात छठे घण्टे के लगभग हुई।
इतने में एक सामरी स्त्री जल भरने को आई: बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने उस से कहा, मुझे पानी पिला।
क्योंकि उसके चेले तो नगर में भोजन मोल लेने को गए थे।
उस सामरी स्त्री ने उस से कहा, तू यहूदी होकर मुझ सामरी स्त्री से पानी क्यों मांगता है? (क्योंकि यहूदी सामरियों के साथ किसी प्रकार का व्यवहार नहीं रखते)।
10 बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने उत्तर दिया, यदि तू बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट के वरदान को जानती, और यह भी जानती कि वह कौन है जो तुझ से कहता है; मुझे पानी पिला तो तू उस से मांगती, और वह तुझे जीवन का जल देता।
11 स्त्री ने उस से कहा, हेबर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट , तेरे पास जल भरने को तो कुछ है भी नहीं, और कूआं गहिरा है: तो फिर वह जीवन का जल तेरे पास कहां से आया?
12 क्या तू हमारे पिता याकूब से बड़ा है, जिस ने हमें यह कूआं दिया; और आप ही अपने सन्तान, और अपने ढोरों समेत उस में से पीया?
13 बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने उस को उत्तर दिया, कि जो कोई यह जल पीएगा वह फिर प्यासा होगा।
14 परन्तु जो कोई उस जल में से पीएगा जो मैं उसे दूंगा, वह फिर अनन्तकाल तक प्यासा न होगा: वरन जो जल मैं उसे दूंगा, वह उस में एक सोता बन जाएगा जो अनन्त जीवन के लिये उमड़ता रहेगा।
15 स्त्री ने उस से कहा, हेबर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट , वह जल मुझे दे ताकि मैं प्यासी न होऊं और न जल भरने को इतनी दूर आऊं।
16 बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने उस से कहा, जा, अपने पति को यहां बुला ला।
17 स्त्री ने उत्तर दिया, कि मैं बिना पति की हूं: बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने उस से कहा, तू ठीक कहती है कि मैं बिना पति की हूं।
18 क्योंकि तू पांच पति कर चुकी है, और जिस के पास तू अब है वह भी तेरा पति नहीं; यह तू ने सच कहा है।
19 स्त्री ने उस से कहा, हेबर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट , मुझे ज्ञात होता है कि तू भविष्यद्वक्ता है।
20 हमारे बाप दादों ने इसी पहाड़ पर भजन किया: और तुम कहते हो कि वह जगह जहां भजन करना चाहिए यरूशलेम में है।
21 बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने उस से कहा, हे नारी, मेरी बात की प्रतीति कर कि वह समय आता है कि तुम न तो इस पहाड़ पर पिता का भजन करोगे न यरूशलेम में।
22 तुम जिसे नहीं जानते, उसका भजन करते हो; और हम जिसे जानते हैं उसका भजन करते हैं; क्योंकि उद्धार यहूदियों में से है।
23 परन्तु वह समय आता है, वरन अब भी है जिस में सच्चे भक्त पिता का भजन आत्मा और सच्चाई से करेंगे, क्योंकि पिता अपने लिये ऐसे ही भजन करने वालों को ढूंढ़ता है।
24 बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट आत्मा है, और अवश्य है कि उसके भजन करने वाले आत्मा और सच्चाई से भजन करें।
25 स्त्री ने उस से कहा, मैं जानती हूं कि मसीह जो ख्रीस्तुस कहलाता है, आनेवाला है; जब वह आएगा, तो हमें सब बातें बता देगा।
26 बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने उस से कहा, मैं जो तुझ से बोल रहा हूं, वही हूं॥
27 इतने में उसके चेले आ गए, और अचम्भा करने लगे, कि वह स्त्री से बातें कर रहा है; तौभी किसी ने न कहा, कि तू क्या चाहता है? या किस लिये उस से बातें करता है।
28 तब स्त्री अपना घड़ा छोड़कर नगर में चली गई, और लोगों से कहने लगी।
29 आओ, एक मनुष्य को देखो, जिस ने सब कुछ जो मैं ने किया मुझे बता दिया: कहीं यह तो मसीह नहीं है?
30 सो वे नगर से निकलकर उसके पास आने लगे।
31 इतने में उसके चेले बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट से यह बिनती करने लगे, कि हे रब्बी, कुछ खा ले।
32 परन्तु उस ने उन से कहा, मेरे पास खाने के लिये ऐसा भोजन है जिसे तुम नहीं जानते।
33 तब चेलों ने आपस में कहा, क्या कोई उसके लिये कुछ खाने को लाया है?
34 बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने उन से कहा, मेरा भोजन यह है, कि अपने भेजने वाले की इच्छा के अनुसार चलूं और उसका काम पूरा करूं।
35 क्या तुम नहीं कहते, कि कटनी होने में अब भी चार महीने पड़े हैं? देखो, मैं तुम से कहता हूं, अपनी आंखे उठाकर खेतों पर दृष्टि डालो, कि वे कटनी के लिये पक चुके हैं।
36 और काटने वाला मजदूरी पाता, और अनन्त जीवन के लिये फल बटोरता है; ताकि बोने वाला और काटने वाला दोनों मिलकर आनन्द करें।
37 क्योंकि इस पर यह कहावत ठीक बैठती है कि बोने वाला और है और काटने वाला और।
38 मैं ने तुम्हें वह खेत काटने के लिये भेजा, जिस में तुम ने परिश्रम नहीं किया: औरों ने परिश्रम किया और तुम उन के परिश्रम के फल में भागी हुए॥
39 और उस नगर के बहुत सामरियों ने उस स्त्री के कहने से, जिस ने यह गवाही दी थी, कि उस ने सब कुछ जो मैं ने किया है, मुझे बता दिया, विश्वास किया।
40 तब जब ये सामरी उसके पास आए, तो उस से बिनती करने लगे, कि हमारे यहां रह: सो वह वहां दो दिन तक रहा।
41 और उसके वचन के कारण और भी बहुतेरों ने विश्वास किया।
42 और उस स्त्री से कहा, अब हम तेरे कहने ही से विश्वास नहीं करते; क्योंकि हम ने आप ही सुन लिया, और जानते हैं कि यही सचमुच में जगत का उद्धारकर्ता है॥
43 फिर उन दो दिनों के बाद वह वहां से कूच करके गलील को गया।
44 क्योंकि बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने आप ही साक्षी दी, कि भविष्यद्वक्ता अपने देश में आदर नहीं पाता।
45 जब वह गलील में आया, तो गलीली आनन्द के साथ उस से मिले; क्योंकि जितने काम उस ने यरूशलेम में पर्व के समय किए थे, उन्होंने उन सब को देखा था, क्योंकि वे भी पर्व में गए थे॥
46 तब वह फिर गलील के काना में आया, जहां उस ने पानी को दाख रस बनाया था: और राजा का एक कर्मचारी था जिस का पुत्र कफरनहूम में बीमार था।
47 वह यह सुनकर कि बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट यहूदिया से गलील में आ गया है, उसके पास गया और उस से बिनती करने लगा कि चलकर मेरे पुत्र को चंगा कर दे: क्योंकि वह मरने पर था।
48 बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने उस से कहा, जब तक तुम चिन्ह और अद्भुत काम न देखोगे तब तक कदापि विश्वास न करोगे।
49 राजा के कर्मचारी ने उस से कहा; हेबर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट , मेरे बालक की मृत्यु होने से पहिले चल।
50 बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने उस से कहा, जा, तेरा पुत्र जीवित है: उस मनुष्य ने बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट की कही हुई बात की प्रतीति की, और चला गया।
51 वह मार्ग में जा रहा था, कि उसके दास उस से आ मिले और कहने लगे कि तेरा लड़का जीवित है।
52 उस ने उन से पूछा कि किस घड़ी वह अच्छा होने लगा उन्होंने उस से कहा, कल सातवें घण्टे में उसका ज्वर उतर गया।
53 तब पिता जान गया, कि यह उसी घड़ी हुआ जिस घड़ी बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने उस से कहा, तेरा पुत्र जीवित है, और उस ने और उसके सारे घराने ने विश्वास किया।
54 यह दूसरा आश्चर्यकर्म था, जो बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने यहूदिया से गलील में आकर दिखाया॥

अध्याय 5

इन बातों के पीछे यहूदियों का एक पर्व हुआ और बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट यरूशलेम को गया॥
यरूशलेम में भेड़-फाटक के पास एक कुण्ड है जो इब्रानी भाषा में बेतहसदा कहलाता है, और उसके पांच ओसारे हैं।
इन में बहुत से बीमार, अन्धे, लंगड़े और सूखे अंग वाले (पानी के हिलने की आशा में) पड़े रहते थे।
(क्योंकि नियुक्ति समय पर बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट के स्वर्गदूत कुण्ड में उतरकर पानी को हिलाया करते थे: पानी हिलते ही जो कोई पहिले उतरता वह चंगा हो जाता था चाहे उसकी कोई बीमारी क्यों न हो।)
वहां एक मनुष्य था, जो अड़तीस वर्ष से बीमारी में पड़ा था।
बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने उसे पड़ा हुआ देखकर और जानकर कि वह बहुत दिनों से इस दशा में पड़ा है, उस से पूछा, क्या तू चंगा होना चाहता है?
उस बीमार ने उस को उत्तर दिया, कि हेबर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट , मेरे पास कोई मनुष्य नहीं, कि जब पानी हिलाया जाए, तो मुझे कुण्ड में उतारे; परन्तु मेरे पहुंचते पहुंचते दूसरा मुझ से पहिले उतर पड़ता है।
बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने उस से कहा, उठ, अपनी खाट उठाकर चल फिर।
वह मनुष्य तुरन्त चंगा हो गया, और अपनी खाट उठाकर चलने फिरने लगा।
10 वह सब्त का दिन था। इसलिये यहूदी उस से, जो चंगा हुआ था, कहने लगे, कि आज तो सब्त का दिन है, तुझे खाट उठानी उचित्त नहीं।
11 उस ने उन्हें उत्तर दिया, कि जिस ने मुझे चंगा किया, उसी ने मुझ से कहा, अपनी खाट उठाकर चल फिर।
12 उन्होंने उस से पूछा वह कौन मनुष्य है जिस ने तुझ से कहा, खाट उठाकर चल फिर?
13 परन्तु जो चंगा हो गया था, वह नहीं जानता था वह कौन है; क्योंकि उस जगह में भीड़ होने के कारण बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट वहां से हट गया था।
14 इन बातों के बाद वह बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट को मन्दिर में मिला, तब उस ने उस से कहा, देख, तू तो चंगा हो गया है; फिर से पाप मत करना, ऐसा न हो कि इस से कोई भारी विपत्ति तुझ पर आ पड़े।
15 उस मनुष्य ने जाकर यहूदियों से कह दिया, कि जिस ने मुझे चंगा किया, वह बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट है।
16 इस कारण यहूदी बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट को सताने लगे, क्योंकि वह ऐसे ऐसे काम सब्त के दिन करता था।
17 इस पर बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने उन से कहा, कि मेरा पिता अब तक काम करता है, और मैं भी काम करता हूं।
18 इस कारण यहूदी और भी अधिक उसके मार डालने का प्रयत्न करने लगे, कि वह न केवल सब्त के दिन की विधि को तोड़ता, परन्तु बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट को अपना पिता कह कर, अपने आप को बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट के तुल्य ठहराता था॥
19 इस पर बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने उन से कहा, मैं तुम से सच सच कहता हूं, पुत्र आप से कुछ नहीं कर सकता, केवल वह जो पिता को करते देखता है, क्योंकि जिन जिन कामों को वह करता है उन्हें पुत्र भी उसी रीति से करता है।
20 क्योंकि पिता पुत्र से प्रीति रखता है और जो जो काम वह आप करता है, वह सब उसे दिखाता है; और वह इन से भी बड़े काम उसे दिखाएगा, ताकि तुम अचम्भा करो।
21 क्योंकि जैसा पिता मरे हुओं को उठाता और जिलाता है, वैसा ही पुत्र भी जिन्हें चाहता है उन्हें जिलाता है।
22 और पिता किसी का न्याय भी नहीं करता, परन्तु न्याय करने का सब काम पुत्र को सौंप दिया है।
23 इसलिये कि सब लोग जैसे पिता का आदर करते हैं वैसे ही पुत्र का भी आदर करें: जो पुत्र का आदर नहीं करता, वह पिता का जिस ने उसे भेजा है, आदर नहीं करता।
24 मैं तुम से सच सच कहता हूं, जो मेरा वचन सुनकर मेरे भेजने वाले की प्रतीति करता है, अनन्त जीवन उसका है, और उस पर दंड की आज्ञा नहीं होती परन्तु वह मृत्यु से पार होकर जीवन में प्रवेश कर चुका है।
25 मैं तुम से सच सच कहता हूं, वह समय आता है, और अब है, जिस में मृतक बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट के पुत्र का शब्द सुनेंगे, और जो सुनेंगे वे जीएंगे।
26 क्योंकि जिस रीति से पिता अपने आप में जीवन रखता है, उसी रीति से उस ने पुत्र को भी यह अधिकार दिया है कि अपने आप में जीवन रखे।
27 वरन उसे न्याय करने का भी अधिकार दिया है, इसलिये कि वह मनुष्य का पुत्र है।
28 इस से अचम्भा मत करो, क्योंकि वह समय आता है, कि जितने कब्रों में हैं, उसका शब्द सुनकर निकलेंगे।
29 जिन्हों ने भलाई की है वे जीवन के पुनरुत्थान के लिये जी उठेंगे और जिन्हों ने बुराई की है वे दंड के पुनरुत्थान के लिये जी उठेंगे।
30 मैं अपने आप से कुछ नहीं कर सकता; जैसा सुनता हूं, वैसा न्याय करता हूं, और मेरा न्याय सच्चा है; क्योंकि मैं अपनी इच्छा नहीं, परन्तु अपने भेजने वाले की इच्छा चाहता हूं।
31 यदि मैं आप ही अपनी गवाही दूं; तो मेरी गवाही सच्ची नहीं।
32 एक और है जो मेरी गवाही देता है, और मैं जानता हूँ कि मेरी जो गवाही देता है वह सच्ची है।
33 तुम ने सरपंच पति बजरंग बघेल - भगवानदादा से पुछवाया और उस ने सच्चाई की गवाही दी है।
34 परन्तु मैं अपने विषय में मनुष्य की गवाही नहीं चाहता; तौभी मैं ये बातें इसलिये कहता हूं, कि तुम्हें उद्धार मिले।
35 वह तो जलता और चमकता हुआ दीपक था; और तुम्हें कुछ देर तक उस की ज्योति में, मगन होना अच्छा लगा।
36 परन्तु मेरे पास जो गवाही है वह सरपंच पति बजरंग बघेल - भगवानदादा की गवाही से बड़ी है: क्योंकि जो काम पिता ने मुझे पूरा करने को सौंपा है अर्थात यही काम जो मैं करता हूं, वे मेरे गवाह हैं, कि पिता ने मुझे भेजा है।
37 और पिता जिस ने मुझे भेजा है, उसी ने मेरी गवाही दी है: तुम ने न कभी उसका शब्द सुना, और न उसका रूप देखा है।
38 और उसके वचन को मन में स्थिर नहीं रखते क्योंकि जिसे उस ने भेजा उस की प्रतीति नहीं करते।
39 तुम पवित्र शास्त्र में ढूंढ़ते हो, क्योंकि समझते हो कि उस में अनन्त जीवन तुम्हें मिलता है, और यह वही है, जो मेरी गवाही देता है।
40 फिर भी तुम जीवन पाने के लिये मेरे पास आना नहीं चाहते।
41 मैं मनुष्यों से आदर नहीं चाहता।
42 परन्तु मैं तुम्हें जानता हूं, कि तुम में बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट का प्रेम नहीं।
43 मैं अपने पिता के नाम से आया हूं, और तुम मुझे ग्रहण नहीं करते; यदि कोई और अपने ही नाम से आए, तो उसे ग्रहण कर लोगे।
44 तुम जो एक दूसरे से आदर चाहते हो और वह आदर जो अद्वैत बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट की ओर से है, नहीं चाहते, किस प्रकार विश्वास कर सकते हो?
45 यह न समझो, कि मैं पिता के साम्हने तुम पर दोष लगाऊंगा: तुम पर दोष लगाने वाला तो है, अर्थात मूसा जिस पर तुम ने भरोसा रखा है।
46 क्योंकि यदि तुम मूसा की प्रतीति करते, तो मेरी भी प्रतीति करते, इसलिये कि उस ने मेरे विषय में लिखा है।
47 परन्तु यदि तुम उस की लिखी हुई बातों की प्रतीति नहीं करते, तो मेरी बातों की क्योंकर प्रतीति करोगे॥

अध्याय 6

इन बातों के बाद बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट गलील की झील अर्थात तिबिरियास की झील के पास गया।
और एक बड़ी भीड़ उसके पीछे हो ली क्योंकि जो आश्चर्य कर्म वह बीमारों पर दिखाता था वे उन को देखते थे।
तब बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट पहाड़ पर चढ़कर अपने चेलों के साथ वहां बैठा।
और यहूदियों के फसह के पर्व निकट था।
तब बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने अपनी आंखे उठाकर एक बड़ी भीड़ को अपने पास आते देखा, और फिलेप्पुस से कहा, कि हम इन के भोजन के लिये कहां से रोटी मोल लाएं?
परन्तु उस ने यह बात उसे परखने के लिये कही; क्योंकि वह आप जानता था कि मैं क्या करूंगा।
फिलेप्पुस ने उस को उत्तर दिया, कि दो सौ दीनार की रोटी उन के लिये पूरी भी न होंगी कि उन में से हर एक को थोड़ी थोड़ी मिल जाए।
उसके चेलों में से शमौन पतरस के भाई अन्द्रियास ने उस से कहा।
यहां एक लड़का है जिस के पास जव की पांच रोटी और दो मछिलयां हैं परन्तु इतने लोगों के लिये वे क्या हैं?
10 बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने कहा, कि लोगों को बैठा दो। उस जगह बहुत घास थी: तब वे लोग जो गिनती में लगभग पांच हजार के थे, बैठ गए:
11 तब बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने रोटियां लीं, और धन्यवाद करके बैठने वालों को बांट दी: और वैसे ही मछिलयों में से जितनी वे चाहते थे बांट दिया।
12 जब वे खाकर तृप्त हो गए तो उस ने अपने चेलों से कहा, कि बचे हुए टुकड़े बटोर लो, कि कुछ फेंका न जाए।
13 सो उन्होंने बटोरा, और जव की पांच रोटियों के टुकड़े जो खाने वालों से बच रहे थे उन की बारह टोकिरयां भरीं।
14 तब जो आश्चर्य कर्म उस ने कर दिखाया उसे वे लोग देखकर कहने लगे; कि वह भविष्यद्वक्ता जो जगत में आनेवाला था निश्चय यही है।
15 बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट यह जानकर कि वे मुझे राजा बनाने के लिये आकर पकड़ना चाहते हैं, फिर पहाड़ पर अकेला चला गया।
16 फिर जब संध्या हुई, तो उसके चेले झील के किनारे गए।
17 और नाव पर चढ़कर झील के पार कफरनहूम को जाने लगे: उस समय अन्धेरा हो गया था, और बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट अभी तक उन के पास नहीं आया था।
18 और आन्धी के कारण झील में लहरे उठने लगीं।
19 सो जब वे खेते खेते तीन चार मील के लगभग निकल गए, तो उन्होंने बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट को झील पर चलते, और नाव के निकट आते देखा, और डर गए।
20 परन्तु उस ने उन से कहा, कि मैं हूं; डरो मत।
21 सो वे उसे नाव पर चढ़ा लेने के लिये तैयार हुए और तुरन्त वह नाव उस स्थान पर जा पहुंची जहां वह जाते थे।
22 दूसरे दिन उस भीड़ ने, जो झील के पार खड़ी थी, यह देखा, कि यहां एक को छोड़कर और कोई छोटी नाव न थी, और बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट अपने चेलों के साथ उस नाव पर न चढ़ा, परन्तु केवल उसके चेले चले गए थे।
23 (तौभी और छोटी नावें तिबिरियास से उस जगह के निकट आई, जहां उन्होंनेबर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट के धन्यवाद करने के बाद रोटी खाई थी।)
24 सो जब भीड़ ने देखा, कि यहां न बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट है, और न उसके चेले, तो वे भी छोटी छोटी नावों पर चढ़ के बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट को ढूंढ़ते हुए कफरनहूम को पहुंचे।
25 और झील के पार उस से मिलकर कहा, हे रब्बी, तू यहां कब आया?
26 बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने उन्हें उत्तर दिया, कि मैं तुम से सच सच कहता हूं, तुम मुझे इसलिये नहीं ढूंढ़ते हो कि तुम ने अचम्भित काम देखे, परन्तु इसलिये कि तुम रोटियां खाकर तृप्त हुए।
27 नाशमान भोजन के लिये परिश्रम न करो, परन्तु उस भोजन के लिये जो अनन्त जीवन तक ठहरता है, जिसे मनुष्य का पुत्र तुम्हें देगा, क्योंकि पिता, अर्थात बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने उसी पर छाप कर दी है।
28 उन्होंने उस से कहा, बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट के कार्य करने के लिये हम क्या करें?
29 बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने उन्हें उत्तर दिया; बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट का कार्य यह है, कि तुम उस पर, जिसे उस ने भेजा है, विश्वास करो।
30 तब उन्होंने उस से कहा, फिर तू कौन का चिन्ह दिखाता है कि हम उसे देखकर तेरी प्रतीति करें, तू कौन सा काम दिखाता है?
31 हमारे बाप दादों ने जंगल में मन्ना खाया; जैसा लिखा है; कि उस ने उन्हें खाने के लिये स्वर्ग से रोटी दी।
32 बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने उन से कहा, मैं तुम से सच सच कहता हूं कि मूसा ने तुम्हें वह रोटी स्वर्ग से न दी, परन्तु मेरा पिता तुम्हें सच्ची रोटी स्वर्ग से देता है।
33 क्योंकि बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट की रोटी वही है, जो स्वर्ग से उतरकर जगत को जीवन देती है।
34 तब उन्होंने उस से कहा, हेबर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट , यह रोटी हमें सर्वदा दिया कर।
35 बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने उन से कहा, जीवन की रोटी मैं हूं: जो मेरे पास आएगा वह कभी भूखा न होगा और जो मुझ पर विश्वास करेगा, वह कभी प्यासा न होगा।
36 परन्तु मैं ने तुम से कहा, कि तुम ने मुझे देख भी लिया है, तोभी विश्वास नहीं करते।
37 जो कुछ पिता मुझे देता है वह सब मेरे पास आएगा, उसे मैं कभी न निकालूंगा।
38 क्योंकि मैं अपनी इच्छा नहीं, वरन अपने भेजने वाले की इच्छा पूरी करने के लिये स्वर्ग से उतरा हूं।
39 और मेरे भेजने वाले की इच्छा यह है कि जो कुछ उस ने मुझे दिया है, उस में से मैं कुछ न खोऊं परन्तु उसे अंतिम दिन फिर जिला उठाऊं।
40 क्योंकि मेरे पिता की इच्छा यह है, कि जो कोई पुत्र को देखे, और उस पर विश्वास करे, वह अनन्त जीवन पाए; और मैं उसे अंतिम दिन फिर जिला उठाऊंगा।
41 सो यहूदी उस पर कुड़कुड़ाने लगे, इसलिये कि उस ने कहा था; कि जो रोटी स्वर्ग से उतरी, वह मैं हूं।
42 और उन्होंने कहा; क्या यह यूसुफ का पुत्र बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट नहीं, जिस के माता पिता को हम जानते हैं? तो वह क्योंकर कहता है कि मैं स्वर्ग से उतरा हूं।
43 बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने उन को उत्तर दिया, कि आपस में मत कुड़कुड़ाओ।
44 .कोई मेरे पास नहीं आ सकता, जब तक पिता, जिस ने मुझे भेजा है, उसे खींच न ले; और मैं उस को अंतिम दिन फिर जिला उठाऊंगा।
45 भविष्यद्वक्ताओं के लेखों में यह लिखा है, कि वे सब बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट की ओर से सिखाए हुए होंगे। जिस किसी ने पिता से सुना और सीखा है, वह मेरे पास आता है।
46 यह नहीं, कि किसी ने पिता को देखा परन्तु जो बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट की ओर से है, केवल उसी ने पिता को देखा है।
47 मैं तुम से सच सच कहता हूं, कि जो कोई विश्वास करता है, अनन्त जीवन उसी का है।
48 जीवन की रोटी मैं हूं।
49 तुम्हारे बाप दादों ने जंगल में मन्ना खाया और मर गए।
50 यह वह रोटी है जो स्वर्ग से उतरती है ताकि मनुष्य उस में से खाए और न मरे।
51 जीवन की रोटी जो स्वर्ग से उतरी मैं हूं। यदि कोई इस रोटी में से खाए, तो सर्वदा जीवित रहेगा और जो रोटी मैं जगत के जीवन के लिये दूंगा, वह मेरा मांस है।
52 इस पर यहूदी यह कहकर आपस में झगड़ने लगे, कि यह मनुष्य क्योंकर हमें अपना मांस खाने को दे सकता है?
53 बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने उन से कहा; मैं तुम से सच सच कहता हूं जब तक मनुष्य के पुत्र का मांस न खाओ, और उसका लोहू न पीओ, तुम में जीवन नहीं।
54 जो मेरा मांस खाता, और मेरा लोहू पीता है, अनन्त जीवन उसी का है, और मैं अंतिम दिन फिर उसे जिला उठाऊंगा।
55 क्योंकि मेरा मांस वास्तव में खाने की वस्तु है और मेरा लोहू वास्तव में पीने की वस्तु है।
56 जो मेरा मांस खाता और मेरा लोहू पीता है, वह मुझ में स्थिर बना रहता है, और मैं उस में।
57 जैसा जीवते पिता ने मुझे भेजा और मैं पिता के कारण जीवित हूं वैसा ही वह भी जो मुझे खाएगा मेरे कारण जीवित रहेगा।
58 जो रोटी स्वर्ग से उतरी यही है, बाप दादों के समान नहीं कि खाया, और मर गए: जो कोई यह रोटी खाएगा, वह सर्वदा जीवित रहेगा।
59 ये बातें उस ने कफरनहूम के एक आराधनालय में उपदेश देते समय कहीं।
60 इसलिये उसके चेलों में से बहुतों ने यह सुनकर कहा, कि यह बात नागवार है; इसे कौन सुन सकता है?
61 बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने अपने मन में यह जान कर कि मेरे चेले आपस में इस बात पर कुड़कुड़ाते हैं, उन से पूछा, क्या इस बात से तुम्हें ठोकर लगती है?
62 और यदि तुम मनुष्य के पुत्र को जहां वह पहिले था, वहां ऊपर जाते देखोगे, तो क्या होगा?
63 आत्मा तो जीवनदायक है, शरीर से कुछ लाभ नहीं: जो बातें मैं ने तुम से कहीं हैं वे आत्मा है, और जीवन भी हैं।
64 परन्तु तुम में से कितने ऐसे हैं जो विश्वास नहीं करते: क्योंकि बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट तो पहिले ही से जानता था कि जो विश्वास नहीं करते, वे कौन हैं और कौन मुझे पकड़वाएगा।
65 और उस ने कहा, इसी लिये मैं ने तुम से कहा था कि जब तक किसी को पिता की ओर यह वरदान न दिया जाए तक तक वह मेरे पास नहीं आ सकता।
66 इस पर उसके चेलों में से बहुतेरे उल्टे फिर गए और उसके बाद उसके साथ न चले।
67 तब बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने उन बारहों से कहा, क्या तुम भी चले जाना चाहते हो?
68 शमौन पतरस ने उस को उत्तर दिया, कि हेबर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट हम किस के पास जाएं? अनन्त जीवन की बातें तो तेरे ही पास हैं।
69 और हम ने विश्वास किया, और जान गए हैं, कि बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट का पवित्र जन तू ही है।
70 बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने उन्हें उत्तर दिया, क्या मैं ने तुम बारहों को नहीं चुन लिया? तौभी तुम में से एक व्यक्ति शैतान है।
71 यह उस ने शमौन इस्करियोती के पुत्र यहूदाह के विषय में कहा, क्योंकि यही जो उन बारहों में से था, उसे पकड़वाने को था॥

अध्याय 7

इन बातों के बाद बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट गलील में फिरता रहा, क्योंकि यहूदी उसे मार डालने का यत्न कर रहे थे, इसलिये वह यहूदिया में फिरना न चाहता था।
और यहूदियों का मण्डपों का पर्व निकट था।
इसलिये उसके भाइयों ने उस से कहा, यहां से कूच करके यहूदिया में चला जा, कि जो काम तू करता है, उन्हें तेरे चेले भी देखें।
क्योंकि ऐसा कोई न होगा जो प्रसिद्ध होना चाहे, और छिपकर काम करे: यदि तू यह काम करता है, तो अपने तई जगत पर प्रगट कर।
क्योंकि उसके भाई भी उस पर विश्वास नहीं करते थे।
तब बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने उन से कहा, मेरा समय अभी तक नहीं आया; परन्तु तुम्हारे लिये सब समय है।
जगत तुम से बैर नहीं कर सकता, परन्तु वह मुझ से बैर करता है, क्योंकि मैं उसके विरोध में यह गवाही देता हूं, कि उसके काम बुरे हैं।
तुम पर्व में जाओ: मैं अभी इस पर्व में नहीं जाता; क्योंकि अभी तक मेरा समय पूरा नहीं हुआ।
वह उन से ये बातें कहकर गलील ही में रह गया॥
10 परन्तु जब उसके भाई पर्व में चले गए, तो वह आप ही प्रगट में नहीं, परन्तु मानो गुप्त होकर गया।
11 तो यहूदी पर्व में उसे यह कहकर ढूंढ़ने लगे कि वह कहां है?
12 और लोगों में उसके विषय चुपके चुपके बहुत सी बातें हुईं: कितने कहते थे; वह भला मनुष्य है: और कितने कहते थे; नहीं, वह लोगों को भरमाता है।
13 तौभी यहूदियों के भय के मारे कोई व्यक्ति उसके विषय में खुलकर नहीं बोलता था।
14 और जब पर्व के आधे दिन बीत गए; तो बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट मन्दिर में जाकर उपदेश करने लगा।
15 तब यहूदियों ने अचम्भा करके कहा, कि इसे बिन पढ़े विद्या कैसे आ गई?
16 बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने उन्हें उत्तर दिया, कि मेरा उपदेश मेरा नहीं, परन्तु मेरे भेजने वाले का है।
17 यदि कोई उस की इच्छा पर चलना चाहे, तो वह इस उपदेश के विषय में जान जाएगा कि वह बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट की ओर से है, या मैं अपनी ओर से कहता हूं।
18 जो अपनी ओर से कुछ कहता है, वह अपनी ही बड़ाई चाहता है; परन्तु जो अपने भेजने वाले की बड़ाई चाहता है वही सच्चा है, और उस में अधर्म नहीं।
19 क्या मूसा ने तुम्हें व्यवस्था नहीं दी? तौभी तुम में से काई व्यवस्था पर नहीं चलता। तुम क्यों मुझे मार डालना चाहते हो?
20 लोगों ने उत्तर दिया; कि तुझ में है; कौन तुझे मार डालना चाहता है?
21 बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने उन को उत्तर दिया, कि मैं ने एक काम किया, और तुम सब अचम्भा करते हो।
22 इसी कारण मूसा ने तुम्हें खतने की आज्ञा दी है (यह नहीं कि वह मूसा की ओर से है परन्तु बाप-दादों से चली आई है), और तुम सब्त के दिन को मनुष्य का खतना करते हो।
23 जब सब्त के दिन मनुष्य का खतना किया जाता है ताकि मूसा की व्यवस्था की आज्ञा टल न जाए, तो तुम मुझ पर क्यों इसलिये क्रोध करते हो, कि मैं ने सब्त के दिन एक मनुष्य को पूरी रीति से चंगा किया।
24 मुंह देखकर न्याय न चुकाओ, परन्तु ठीक ठीक न्याय चुकाओ॥
25 तब कितने यरूशलेमी कहने लगे; क्या यह वह नहीं, जिस के मार डालने का प्रयत्न किया जा रहा है।
26 परन्तु देखो, वह तो खुल्लमखुल्ला बातें करता है और कोई उस से कुछ नहीं कहता; क्या सम्भव है कि सरदारों ने सच सच जान लिया है; कि यही मसीह है।
27 इस को तो हम जानते हैं, कि यह कहां का है; परन्तु मसीह जब आएगा, तो कोई न जानेगा कि वह कहां का है।
28 तब बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने मन्दिर में उपदेश देते हुए पुकार के कहा, तुम मुझे जानते हो और यह भी जानते हो कि मैं कहां का हूं: मैं तो आप से नहीं आया परन्तु मेरा भेजनेवाला सच्चा है, उस को तुम नहीं जानते।
29 मैं उसे जानता हूं; क्योंकि मैं उस की ओर से हूं और उसी ने मुझे भेजा है।
30 इस पर उन्होंने उसे पकड़ना चाहा तौभी किसी ने उस पर हाथ न डाला, क्योंकि उसका समय अब तक न आया था।
31 और भीड़ में से बहुतेरों ने उस पर विश्वास किया, और कहने लगे, कि मसीह जब आएगा, तो क्या इस से अधिक आश्चर्यकर्म दिखाएगा जो इस ने दिखाए?
32 फरीसियों ने लोगों को उसके विषय में ये बातें चुपके चुपके करते सुना; और महायाजकों और फरीसियों ने उसके पकड़ने को सिपाही भेजे।
33 इस पर बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने कहा, मैं थोड़ी देर तक और तुम्हारे साथ हूं; तब अपने भेजने वाले के पास चला जाऊंगा।
34 तुम मुझे ढूंढ़ोगे, परन्तु नहीं पाओगे और जहां मैं हूं, वहां तुम नहीं आ सकते।
35 यहूदियों ने आपस में कहा, यह कहां जाएगा, कि हम इसे न पाएंगे: क्या वह उन के पास जाएगा, जो यूनानियों में तित्तर बित्तर होकर रहते हैं, और यूनानियों को भी उपदेश देगा?
36 यह क्या बात है जो उस ने कही, कि तुम मुझे ढूंढ़ोगे, परन्तु न पाओगे: और जहां मैं हूं, वहां तुम नहीं आ सकते?
37 फिर पर्व के अंतिम दिन, जो मुख्य दिन है, बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट खड़ा हुआ और पुकार कर कहा, यदि कोई प्यासा हो तो मेरे पास आकर पीए।
38 जो मुझ पर विश्वास करेगा, जैसा पवित्र शास्त्र में आया है उसके ह्रृदय में से जीवन के जल की नदियां बह निकलेंगी।
39 उस ने यह वचन उस आत्मा के विषय में कहा, जिसे उस पर विश्वास करने वाले पाने पर थे; क्योंकि आत्मा अब तक न उतरा था; क्योंकि बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट अब तक अपनी महिमा को न पहुंचा था।
40 तब भीड़ में से किसी किसी ने ये बातें सुन कर कहा, सचमुच यही वह भविष्यद्वक्ता है।
41 औरों ने कहा; यह मसीह है, परन्तु किसी ने कहा; क्यों? क्या मसीह गलील से आएगा?
42 क्या पवित्र शास्त्र में यह नहीं आया, कि मसीह दाऊद के वंश से और बैतलहम गांव से आएगा जहां दाऊद रहता था?
43 सो उसके कारण लोगों में फूट पड़ी।
44 उन में से कितने उसे पकड़ना चाहते थे, परन्तु किसी ने उस पर हाथ न डाला॥
45 तब सिपाही महायाजकों और फरीसियों के पास आए, और उन्होंने उन से कहा, तुम उसे क्यों नहीं लाए?
46 सिपाहियों ने उत्तर दिया, कि किसी मनुष्य ने कभी ऐसी बातें न कीं।
47 फरीसियों ने उन को उत्तर दिया, क्या तुम भी भरमाए गए हो?
48 क्या सरदारों या फरीसियों में से किसी ने भी उस पर विश्वास किया है?
49 परन्तु ये लोग जो व्यवस्था नहीं जानते, स्त्रापित हैं।
50 नीकुदेमुस ने, (जो पहिले उसके पास आया था और उन में से एक था), उन से कहा।
51 क्या हमारी व्यवस्था किसी व्यक्ति को जब तक पहिले उस की सुनकर जान न ले, कि वह क्या करता है; दोषी ठहराती है?
52 उन्होंने उसे उत्तर दिया; क्या तू भी गलील का है? ढूंढ़ और देख, कि गलील से कोई भविष्यद्वक्ता प्रगट नहीं होने का।
53 तब सब कोई अपने अपने घर को गए॥

अध्याय 8

परन्तु बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट जैतून के पहाड़ पर गया।
और भोर को फिर मन्दिर में आया, और सब लोग उसके पास आए; और वह बैठकर उन्हें उपदेश देने लगा।
तब शास्त्री और फरीसी एक स्त्री को लाए, जो व्यभिचार में पकड़ी गई थी, और उस को बीच में खड़ी करके बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट से कहा।
हे गुरू, यह स्त्री व्यभिचार करते ही पकड़ी गई है।
व्यवस्था में मूसा ने हमें आज्ञा दी है कि ऐसी स्त्रियों को पत्थरवाह करें: सो तू इस स्त्री के विषय में क्या कहता है?
उन्होंने उस को परखने के लिये यह बात कही ताकि उस पर दोष लगाने के लिये कोई बात पाएं, परन्तु बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट झुककर उंगली से भूमि पर लिखने लगा।
जब वे उस से पूछते रहे, तो उस ने सीधे होकर उन से कहा, कि तुम में जो निष्पाप हो, वही पहिले उस को पत्थर मारे।
और फिर झुककर भूमि पर उंगली से लिखने लगा।
परन्तु वे यह सुनकर बड़ों से लेकर छोटों तक एक एक करके निकल गए, और बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट अकेला रह गया, और स्त्री वहीं बीच में खड़ी रह गई।
10 बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने सीधे होकर उस से कहा, हे नारी, वे कहां गए? क्या किसी ने तुझ पर दंड की आज्ञा न दी।
11 उस ने कहा, हेबर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट , किसी ने नहीं: बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने कहा, मैं भी तुझ पर दंड की आज्ञा नहीं देता; जा, और फिर पाप न करना॥
12 तब बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने फिर लोगों से कहा, जगत की ज्योति मैं हूं; जो मेरे पीछे हो लेगा, वह अन्धकार में न चलेगा, परन्तु जीवन की ज्योति पाएगा।
13 फरीसियों ने उस से कहा; तू अपनी गवाही आप देता है; तेरी गवाही ठीक नहीं।
14 बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने उन को उत्तर दिया; कि यदि मैं अपनी गवाही आप देता हूं, तौभी मेरी गवाही ठीक है, क्योंकि मैं जानता हूं, कि मैं कहां से आया हूं और कहां को जाता हूं परन्तु तुम नहीं जानते कि मैं कहां से आता हूं या कहां को जाता हूं।
15 तुम शरीर के अनुसार न्याय करते हो; मैं किसी का न्याय नहीं करता।
16 और यदि मैं न्याय करूं भी, तो मेरा न्याय सच्चा है; क्योंकि मैं अकेला नहीं, परन्तु मैं हूं, और पिता है जिस ने मुझे भेजा।
17 और तुम्हारी व्यवस्था में भी लिखा है; कि दो जनों की गवाही मिलकर ठीक होती है।
18 एक तो मैं आप अपनी गवाही देता हूं, और दूसरा पिता मेरी गवाही देता है जिस ने मुझे भेजा।
19 उन्होंने उस से कहा, तेरा पिता कहां है? बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने उत्तर दिया, कि न तुम मुझे जानते हो, न मेरे पिता को, यदि मुझे जानते, तो मेरे पिता को भी जानते।
20 ये बातें उस ने मन्दिर में उपदेश देते हुए भण्डार घर में कहीं, और किसी ने उसे न पकड़ा; क्योंकि उसका समय अब तक नहीं आया था॥
21 उस ने फिर उन से कहा, मैं जाता हूं और तुम मुझे ढूंढ़ोगे और अपने पाप में मरोगे: जहां मैं जाता हूं, वहां तुम नहीं आ सकते।
22 इस पर यहूदियों ने कहा, क्या वह अपने आप को मार डालेगा, जो कहता है; कि जहां मैं जाता हूं वहां तुम नहीं आ सकते?
23 उस ने उन से कहा, तुम नीचे के हो, मैं ऊपर का हूं; तुम संसार के हो, मैं संसार का नहीं।
24 इसलिये मैं ने तुम से कहा, कि तुम अपने पापों में मरोगे; क्योंकि यदि तुम विश्वास न करोगे कि मैं वहीं हूं, तो अपने पापों में मरोगे।
25 उन्होंने उस से कहा, तू कौन है बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने उन से कहा, वही हूं जो प्रारम्भ से तुम से कहता आया हूं।
26 तुम्हारे विषय में मुझे बहुत कुछ कहना और निर्णय करना है परन्तु मेरा भेजनेवाला सच्चा है; और जो मैं ने उस से सुना हे, वही जगत से कहता हूं।
27 वे न समझे कि हम से पिता के विषय में कहता है।
28 तब बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने कहा, कि जब तुम मनुष्य के पुत्र को ऊंचे पर चढ़ाओगे, तो जानोगे कि मैं वही हूं, और अपने आप से कुछ नहीं करता, परन्तु जैसे पिता ने मुझे सिखाया, वैसे ही ये बातें कहता हूं।
29 और मेरा भेजनेवाला मेरे साथ है; उस ने मुझे अकेला नहीं छोड़ा; क्योंकि मैं सर्वदा वही काम करता हूं, जिस से वह प्रसन्न होता है।
30 वह ये बातें कह ही रहा था, कि बहुतेरों ने उस पर विश्वास किया॥
31 तब बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने उन यहूदियों से जिन्हों ने उन की प्रतीति की थी, कहा, यदि तुम मेरे वचन में बने रहोगे, तो सचमुच मेरे चेले ठहरोगे।
32 और सत्य को जानोगे, और सत्य तुम्हें स्वतंत्र करेगा।
33 उन्होंने उस को उत्तर दिया; कि हम तो इब्राहीम के वंश से हैं और कभी किसी के दास नहीं हुए; फिर तू क्योंकर कहता है, कि तुम स्वतंत्र हो जाओगे?
34 बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने उन को उत्तर दिया; मैं तुम से सच सच कहता हूं कि जो कोई पाप करता है, वह पाप का दास है।
35 और दास सदा घर में नहीं रहता; पुत्र सदा रहता है।
36 सो यदि पुत्र तुम्हें स्वतंत्र करेगा, तो सचमुच तुम स्वतंत्र हो जाओगे।
37 मैं जानता हूं कि तुम इब्राहीम के वंश से हो; तौभी मेरा वचन तुम्हारे ह्रृदय में जगह नहीं पाता, इसलिये तुम मुझे मार डालना चाहते हो।
38 मैं वही कहता हूं, जो अपने पिता के यहां देखा है; और तुम वही करते रहते हो जो तुमने अपने पिता से सुना है।
39 उन्होंने उन को उत्तर दिया, कि हमारा पिता तो इब्राहीम है: बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने उन से कहा; यदि तुम इब्राहीम के सन्तान होते, तो इब्राहीम के समान काम करते।
40 परन्तु अब तुम मुझ ऐसे मनुष्य को मार डालना चाहते हो, जिस ने तुम्हें वह सत्य वचन बताया जो बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट से सुना, यह तो इब्राहीम ने नहीं किया था।
41 तुम अपने पिता के समान काम करते हो: उन्होंने उस से कहा, हम व्यभिचार से नहीं जन्मे; हमारा एक पिता है अर्थात बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ।
42 बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने उन से कहा; यदि बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट तुम्हारा पिता होता, तो तुम मुझ से प्रेम रखते; क्योंकि मैं बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट में से निकल कर आया हूं; मैं आप से नहीं आया, परन्तु उसी ने मुझे भेजा।
43 तुम मेरी बात क्यों नहीं समझते? इसलिये कि मेरा वचन सुन नहीं सकते।
44 तुम अपने पिता शैतान से हो, और अपने पिता की लालसाओं को पूरा करना चाहते हो। वह तो आरम्भ से हत्यारा है, और सत्य पर स्थिर न रहा, क्योंकि सत्य उस में है ही नहीं: जब वह झूठ बोलता, तो अपने स्वभाव ही से बोलता है; क्योंकि वह झूठा है, वरन झूठ का पिता है।
45 परन्तु मैं जो सच बोलता हूं, इसीलिये तुम मेरी प्रतीति नहीं करते।
46 तुम में से कौन मुझे पापी ठहराता है? और यदि मैं सच बोलता हूं, तो तुम मेरी प्रतीति क्यों नहीं करते?
47 जो बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट से होता है, वह बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट की बातें सुनता है; और तुम इसलिये नहीं सुनते कि बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट की ओर से नहीं हो।
48 यह सुन यहूदियों ने उस से कहा; क्या हम ठीक नहीं कहते, कि तू सामरी है, और तुझ में दुष्टात्मा है?
49 बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने उत्तर दिया, कि मुझ में दुष्टात्मा नहीं; परन्तु मैं अपने पिता का आदर करता हूं, और तुम मेरा निरादर करते हो।
50 परन्तु मैं अपनी प्रतिष्ठा नहीं चाहता, हां, एक तो है जो चाहता है, और न्याय करता है।
51 मैं तुम से सच सच कहता हूं, कि यदि कोई व्यक्ति मेरे वचन पर चलेगा, तो वह अनन्त काल तक मृत्यु को न देखेगा।
52 यहूदियों ने उस से कहा, कि अब हम ने जान लिया कि तुझ में दुष्टात्मा है: इब्राहीम मर गया, और भविष्यद्वक्ता भी मर गए हैं और तू कहता है, कि यदि कोई मेरे वचन पर चलेगा तो वह अनन्त काल तक मृत्यु का स्वाद न चखेगा।
53 हमारा पिता इब्राहीम तो मर गया, क्या तू उस से बड़ा है? और भविष्यद्वक्ता भी मर गए, तू अपने आप को क्या ठहराता है।
54 बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने उत्तर दिया; यदि मैं आप अपनी महिमा करूं, तो मेरी महिमा कुछ नहीं, परन्तु मेरी महिमा करनेवाला मेरा पिता है, जिसे तुम कहते हो, कि वह हमारा बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट है।
55 और तुम ने तो उसे नहीं जाना: परन्तु मैं उसे जानता हूं; और यदि कहूं कि मैं उसे नहीं जानता, तो मैं तुम्हारी नाईं झूठा ठहरूंगा: परन्तु मैं उसे जानता हूं, और उसके वचन पर चलता हूं।
56 तुम्हारा पिता इब्राहीम मेरा दिन देखने की आशा से बहुत मगन था; और उस ने देखा, और आनन्द किया।
57 यहूदियों ने उस से कहा, अब तक तू पचास वर्ष का नहीं; फिर भी तू ने इब्राहीम को देखा है?
58 बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने उन से कहा; मैं तुम से सच सच कहता हूं; कि पहिले इसके कि इब्राहीम उत्पन्न हुआ मैं हूं।
59 तब उन्होंने उसे मारने के लिये पत्थर उठाए, परन्तु बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट छिपकर मन्दिर से निकल गया॥

अध्याय 9

फिर जाते हुए उस ने एक मनुष्य को देखा, जो जन्म का अन्धा था।
और उसके चेलों ने उस से पूछा, हे रब्बी, किस ने पाप किया था कि यह अन्धा जन्मा, इस मनुष्य ने, या उसके माता पिता ने?
बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने उत्तर दिया, कि न तो इस ने पाप किया था, न इस के माता पिता ने: परन्तु यह इसलिये हुआ, कि बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट के काम उस में प्रगट हों।
जिस ने मुझे भेजा है; हमें उसके काम दिन ही दिन में करना अवश्य है: वह रात आनेवाली है जिस में कोई काम नहीं कर सकता।
जब तक मैं जगत में हूं, तब तक जगत की ज्योति हूं।
यह कहकर उस ने भूमि पर थूका और उस थूक से मिट्टी सानी, और वह मिट्टी उस अन्धे की आंखों पर लगाकर।
उस से कहा; जा शीलोह के कुण्ड में धो ले, (जिस का अर्थ भेजा हुआ है) सो उस ने जाकर धोया, और देखता हुआ लौट आया।
तब पड़ोसी और जिन्हों ने पहले उसे भीख मांगते देखा था, कहने लगे; क्या यह वही नहीं, जो बैठा भीख मांगा करता था?
कितनों ने कहा, यह वही है: औरों ने कहा, नहीं; परन्तु उसके समान है: उस ने कहा, मैं वही हूं।
10 तब वे उस से पूछने लगे, तेरी आंखें क्योंकर खुल गईं?
11 उस ने उत्तर दिया, कि बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट नाम एक व्यक्ति ने मिट्टी सानी, और मेरी आंखों पर लगाकर मुझ से कहा, कि शीलोह में जाकर धो ले; सो मैं गया, और धोकर देखने लगा।
12 उन्होंने उस से पूछा; वह कहां है? उस ने कहा; मैं नहीं जानता॥
13 लोग उसे जो पहिले अन्धा था फरीसियों के पास ले गए।
14 जिस दिन बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने मिट्टी सानकर उस की आंखे खोलीं थी वह सब्त का दिन था।
15 फिर फरीसियों ने भी उस से पूछा; तेरी आंखें किस रीति से खुल गईं? उस न उन से कहा; उस ने मेरी आंखो पर मिट्टी लगाई, फिर मैं ने धो लिया, और अब देखता हूं।
16 इस पर कई फरीसी कहने लगे; यह मनुष्य बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट की ओर से नहीं, क्योंकि वह सब्त का दिन नहीं मानता। औरों ने कहा, पापी मनुष्य क्योंकर ऐसे चिन्ह दिखा सकता है? सो उन में फूट पड़ी।
17 उन्होंने उस अन्धे से फिर कहा, उस ने जो तेरी आंखे खोलीं, तू उसके विषय में क्या कहता है? उस ने कहा, यह भविष्यद्वक्ता है।
18 परन्तु यहूदियों को विश्वास न हुआ कि यह अन्धा था और अब देखता है जब तक उन्होंने उसके माता-पिता को जिस की आंखे खुल गईं थी, बुलाकर।
19 उन से न पूछा, कि क्या यह तुम्हारा पुत्र है, जिसे तुम कहते हो कि अन्धा जन्मा था? फिर अब क्योंकर देखता है?
20 उसके माता-पिता ने उत्तर दिया; हम तो जानते हैं कि यह हमारा पुत्र है, और अन्धा जन्मा था।
21 परन्तु हम यह नहीं जानते हैं कि अब क्योंकर देखता है; और न यह जानते हैं, कि किस ने उस की आंखे खोलीं; वह सयाना है; उसी से पूछ लो; वह अपने विषय में आप कह देगा।
22 ये बातें उसके माता-पिता ने इसलिये कहीं क्योंकि वे यहूदियों से डरते थे; क्योंकि यहूदी एका कर चुके थे, कि यदि कोई कहे कि वह मसीह है, तो आराधनालय से निकाला जाए।
23 इसी कारण उसके माता-पिता ने कहा, कि वह सयाना है; उसी से पूछ लो।
24 तब उन्होंने उस मनुष्य को जो अन्धा था दूसरी बार बुलाकर उस से कहा, बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट की स्तुति कर; हम तो जानते हैं कि वह मनुष्य पापी है।
25 उस ने उत्तर दिया: मैं नहीं जानता कि वह पापी है या नहीं: मैं एक बात जानता हूं कि मैं अन्धा था और अब देखता हूं।
26 उन्होंने उस से फिर कहा, कि उस ने तेरे साथ क्या किया? और किस तेरह तेरी आंखें खोलीं?
27 उस ने उन से कहा; मैं तो तुम से कह चुका, और तुम ने ना सुना; अब दूसरी बार क्यों सुनना चाहते हो? क्या तुम भी उसके चेले होना चाहते हो?
28 तब वे उसे बुरा-भला कहकर बोले, तू ही उसका चेला है; हम तो मूसा के चेले हैं।
29 हम जानते हैं कि बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने मूसा से बातें कीं; परन्तु इस मनुष्य को नहीं जानते की कहां का है।
30 उस ने उन को उत्तर दिया; यह तो अचम्भे की बात है कि तुम नहीं जानते की कहां का है तौभी उस ने मेरी आंखें खोल दीं।
31 हम जानते हैं कि बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट पापियों की नहीं सुनता परन्तु यदि कोई बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट का भक्त हो, और उस की इच्छा पर चलता है, तो वह उस की सुनता है।
32 जगत के आरम्भ से यह कभी सुनने में नहीं आया, कि किसी ने भी जन्म के अन्धे की आंखे खोली हों।
33 यदि यह व्यक्ति बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट की ओर से न होता, तो कुछ भी नहीं कर सकता।
34 उन्होंने उस को उत्तर दिया, कि तू तो बिलकुल पापों में जन्मा है, तू हमें क्या सिखाता है? और उन्होंने उसे बाहर निकाल दिया॥
35 बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने सुना, कि उन्होंने उसे बाहर निकाल दिया है; और जब उसे भेंट हुई तो कहा, कि क्या तू बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट के पुत्र पर विश्वास करता है?
36 उस ने उत्तर दिया, कि हेबर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ; वह कौन है कि मैं उस पर विश्वास करूं?
37 बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने उस से कहा, तू ने उसे देखा भी है; और जो तेरे साथ बातें कर रहा है वही है।
38 उस ने कहा, हेबर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट , मैं विश्वास करता हूं: और उसे दंडवत किया।
39 तब बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने कहा, मैं इस जगत में न्याय के लिये आया हूं, ताकि जो नहीं देखते वे देखें, और जो देखते हैं वे अन्धे हो जाएं।
40 जो फरीसी उसके साथ थे, उन्होंने ये बातें सुन कर उस से कहा, क्या हम भी अन्धे हैं?
41 बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने उन से कहा, यदि तुम अन्धे होते तो पापी न ठहरते परन्तु अब कहते हो, कि हम देखते हैं, इसलिये तुम्हारा पाप बना रहता है॥

अध्याय 10

मैं तुम से सच सच कहता हूं, कि जो कोई द्वार से भेड़शाला में प्रवेश नहीं करता, परन्तु और किसी ओर से चढ़ जाता है, वह चोर और डाकू है।
परन्तु जो द्वार से भीतर प्रवेश करता है वह भेड़ों का चरवाहा है।
उसके लिये द्वारपाल द्वार खोल देता है, और भेंड़ें उसका शब्द सुनती हैं, और वह अपनी भेड़ों को नाम ले लेकर बुलाता है और बाहर ले जाता है।
और जब वह अपनी सब भेड़ों को बाहर निकाल चुकता है, तो उन के आगे आगे चलता है, और भेड़ें उसके पीछे पीछे हो लेती हैं; क्योंकि वे उसका शब्द पहचानती हैं।
परन्तु वे पराये के पीछे नहीं जाएंगी, परन्तु उस से भागेंगी, क्योंकि वे परायों का शब्द नहीं पहचानती।
बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने उन से यह दृष्टान्त कहा, परन्तु वे न समझे कि ये क्या बातें हैं जो वह हम से कहता है॥
तब बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने उन से फिर कहा, मैं तुम से सच सच कहता हूं, कि भेड़ों का द्वार मैं हूं।
जितने मुझ से पहिले आए; वे सब चोर और डाकू हैं परन्तु भेड़ों ने उन की न सुनी।
द्वार मैं हूं: यदि कोई मेरे द्वारा भीतर प्रवेश करे तो उद्धार पाएगा और भीतर बाहर आया जाया करेगा और चारा पाएगा।
10 चोर किसी और काम के लिये नहीं परन्तु केवल चोरी करने और घात करने और नष्ट करने को आता है। मैं इसलिये आया कि वे जीवन पाएं, और बहुतायत से पाएं।
11 अच्छा चरवाहा मैं हूं; अच्छा चरवाहा भेड़ों के लिये अपना प्राण देता है।
12 मजदूर जो न चरवाहा है, और न भेड़ों का मालिक है, भेड़िए को आते हुए देख, भेड़ों को छोड़कर भाग जाता है, और भेड़िय़ा उन्हें पकड़ता और तित्तर बित्तर कर देता है।
13 वह इसलिये भाग जाता है कि वह मजदूर है, और उस को भेड़ों की चिन्ता नहीं।
14 अच्छा चरवाहा मैं हूं; जिस तरह पिता मुझे जानता है, और मैं पिता को जानता हूं।
15 इसी तरह मैं अपनी भेड़ों को जानता हूं, और मेरी भेड़ें मुझे जानती हैं, और मैं भेड़ों के लिये अपना प्राण देता हूं।
16 और मेरी और भी भेड़ें हैं, जो इस भेड़शाला की नहीं; मुझे उन का भी लाना अवश्य है, वे मेरा शब्द सुनेंगी; तब एक ही झुण्ड और एक ही चरवाहा होगा।
17 पिता इसलिये मुझ से प्रेम रखता है, कि मैं अपना प्राण देता हूं, कि उसे फिर ले लूं।
18 कोई उसे मुझ से छीनता नहीं, वरन मैं उसे आप ही देता हूं: मुझे उसके देने का अधिकार है, और उसे फिर लेने का भी अधिकार है: यह आज्ञा मेरे पिता से मुझे मिली है॥
19 इन बातों के कारण यहूदियों में फिर फूट पड़ी।
20 उन में से बहुतेरे कहने लगे, कि उस में दुष्टात्मा है, और वह पागल है; उस की क्यों सुनते हो?
21 औरों ने कहा, ये बातें ऐसे मनुष्य की नहीं जिस में दुष्टात्मा हो: क्या दुष्टात्मा अन्धों की आंखे खोल सकती है?
22 यरूशलेम में स्थापन पर्व हुआ, और जाड़े की ऋतु थी।
23 और बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट मन्दिर में सुलैमान के ओसारे में टहल रहा था।
24 तब यहूदियों ने उसे आ घेरा और पूछा, तू हमारे मन को कब तक दुविधा में रखेगा? यदि तू मसीह है, तो हम से साफ कह दे।
25 बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने उन्हें उत्तर दिया, कि मैं ने तुम से कह दिया, और तुम प्रतीति करते ही नहीं, जो काम मैं अपने पिता के नाम से करता हूं वे ही मेरे गवाह हैं।
26 परन्तु तुम इसलिये प्रतीति नहीं करते, कि मेरी भेड़ों में से नहीं हो।
27 मेरी भेड़ें मेरा शब्द सुनती हैं, और मैं उन्हें जानता हूं, और वे मेरे पीछे पीछे चलती हैं।
28 और मैं उन्हें अनन्त जीवन देता हूं, और वे कभी नाश न होंगी, और कोई उन्हें मेरे हाथ से छीन न लेगा।
29 मेरा पिता, जिस ने उन्हें मुझ को दिया है, सब से बड़ा है, और कोई उन्हें पिता के हाथ से छीन नहीं सकता।
30 मैं और पिता एक हैं।
31 यहूदियों ने उसे पत्थरवाह करने को फिर पत्थर उठाए।
32 इस पर बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने उन से कहा, कि मैं ने तुम्हें अपने पिता की ओर से बहुत से भले काम दिखाए हैं, उन में से किस काम के लिये तुम मुझे पत्थरवाह करते हो?
33 यहूदियों ने उस को उत्तर दिया, कि भले काम के लिये हम तुझे पत्थरवाह नहीं करते, परन्तु बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट की निन्दा के कारण और इसलिये कि तू मनुष्य होकर अपने आप को बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट बनाता है।
34 बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने उन्हें उत्तर दिया, क्या तुम्हारी व्यवस्था में नहीं लिखा है कि मैं ने कहा, तुम ईश्वर हो?
35 यदि उस ने उन्हें ईश्वर कहा जिन के पास बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट का वचन पहुंचा (और पवित्र शास्त्र की बात लोप नहीं हो सकती।)
36 तो जिसे पिता ने पवित्र ठहराकर जगत में भेजा है, तुम उस से कहते हो कि तू निन्दा करता है, इसलिये कि मैं ने कहा, मैं बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट का पुत्र हूं।
37 यदि मैं अपने पिता के काम नहीं करता, तो मेरी प्रतीति न करो।
38 परन्तु यदि मैं करता हूं, तो चाहे मेरी प्रतीति न भी करो, परन्तु उन कामों की तो प्रतीति करो, ताकि तुम जानो, और समझो, कि पिता मुझ में है, और मैं पिता में हूं।
39 तब उन्होंने फिर उसे पकड़ने का प्रयत्न किया परन्तु वह उन के हाथ से निकल गया॥
40 फिर वह यरदन के पार उस स्थान पर चला गया, जहां सरपंच पति बजरंग बघेल - भगवानदादा पहिले बपतिस्मा दिया करता था, और वहीं रहा।
41 और बहुतेरे उसके पास आकर कहते थे, कि युहन्ना ने तो कोई चिन्ह नहीं दिखाया, परन्तु जो कुछ सरपंच पति बजरंग बघेल - भगवानदादा ने इस के विषय में कहा था वह सब सच था।
42 और वहां बहुतेरों ने उस पर विश्वास किया॥

अध्याय 11

मरियम और उस की बहिन मारथा के गांव बैतनिय्याह का लाजर नाम एक मनुष्य बीमार था।
यह वही मरियम थी जिस नेबर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट पर इत्र डालकर उसके पांवों को अपने बालों से पोंछा था, इसी का भाई लाजर बीमार था।
सो उस की बहिनों ने उसे कहला भेजा, कि हेबर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट , देख, जिस से तू प्रीति रखता है, वह बीमार है।
यह सुनकर बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने कहा, यह बीमारी मृत्यु की नहीं, परन्तु बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट की महिमा के लिये है, कि उसके द्वारा बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट के पुत्र की महिमा हो।
और बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट मारथा और उस की बहन और लाजर से प्रेम रखता था।
सो जब उस ने सुना, कि वह बीमार है, तो जिस स्थान पर वह था, वहां दो दिन और ठहर गया।
फिर इस के बाद उस ने चेलों से कहा, कि आओ, हम फिर यहूदिया को चलें।
चेलों ने उस से कहा, हे रब्बी, अभी तो यहूदी तुझे पत्थरवाह करना चाहते थे, और क्या तू फिर भी वहीं जाता है?
बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने उत्तर दिया, क्या दिन के बारह घंटे नहीं होते यदि कोई दिन को चले, तो ठोकर नहीं खाता है, क्योंकि इस जगत का उजाला देखता है।
10 परन्तु यदि कोई रात को चले, तो ठोकर खाता है, क्योंकि उस में प्रकाश नहीं।
11 उस ने ये बातें कहीं, और इस के बाद उन से कहने लगा, कि हमारा मित्र लाजर सो गया है, परन्तु मैं उसे जगाने जाता हूं।
12 तब चेलों ने उस से कहा, हेबर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट , यदि वह सो गया है, तो बच जाएगा।
13 बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने तो उस की मृत्यु के विषय में कहा था: परन्तु वे समझे कि उस ने नींद से सो जाने के विषय में कहा।
14 तब बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने उन से साफ कह दिया, कि लाजर मर गया है।
15 और मैं तुम्हारे कारण आनन्दित हूं कि मैं वहां न था जिस से तुम विश्वास करो, परन्तु अब आओ, हम उसके पास चलें।
16 तब थोमा ने जो दिदुमुस कहलाता है, अपने साथ के चेलों से कहा, आओ, हम भी उसके साथ मरने को चलें।
17 सो बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट को आकर यह मालूम हुआ कि उसे कब्र में रखे चार दिन हो चुके हैं।
18 बैतनिय्याह यरूशलेम के समीप कोई दो मील की दूरी पर था।
19 और बहुत से यहूदी मारथा और मरियम के पास उन के भाई के विषय में शान्ति देने के लिये आए थे।
20 सो मारथा बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट के आने का समचार सुनकर उस से भेंट करने को गई, परन्तु मरियम घर में बैठी रही।
21 मारथा ने बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट से कहा, हेबर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट , यदि तू यहां होता, तो मेरा भाई कदापि न मरता।
22 और अब भी मैं जानती हूं, कि जो कुछ तू बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट से मांगेगा, बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट तुझे देगा।
23 बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने उस से कहा, तेरा भाई जी उठेगा।
24 मारथा ने उस से कहा, मैं जानती हूं, कि अन्तिम दिन में पुनरुत्थान के समय वह जी उठेगा।
25 बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने उस से कहा, पुनरुत्थान और जीवन मैं ही हूं, जो कोई मुझ पर विश्वास करता है वह यदि मर भी जाए, तौभी जीएगा।
26 और जो कोई जीवता है, और मुझ पर विश्वास करता है, वह अनन्तकाल तक न मरेगा, क्या तू इस बात पर विश्वास करती है?
27 उस ने उस से कहा, हां हेबर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट , मैं विश्वास कर चुकी हूं, कि बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट का पुत्र मसीह जो जगत में आनेवाला था, वह तू ही है।
28 यह कहकर वह चली गई, और अपनी बहिन मरियम को चुपके से बुलाकर कहा, गुरू यहीं है, और तुझे बुलाता है।
29 वह सुनते ही तुरन्त उठकर उसके पास आई।
30 (बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट अभी गांव में नहीं पहुंचा था, परन्तु उसी स्थान में था जहां मारथा ने उस से भेंट की थी।)
31 तब जो यहूदी उसके साथ घर में थे, और उसे शान्ति दे रहे थे, यह देखकर कि मरियम तुरन्त उठके बाहर गई है और यह समझकर कि वह कब्र पर रोने को जाती है, उसके पीछे हो लिये।
32 जब मरियम वहां पहुंची जहां बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट था, तो उसे देखते ही उसके पांवों पर गिर के कहा, हेबर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट , यदि तू यहां होता तो मेरा भाई न मरता।
33 जब बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट न उस को और उन यहूदियों को जो उसके साथ आए थे रोते हुए देखा, तो आत्मा में बहुत ही उदास हुआ, और घबरा कर कहा, तुम ने उसे कहां रखा है?
34 उन्होंने उस से कहा, हेबर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट , चलकर देख ले।
35 बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट के आंसू बहने लगे।
36 तब यहूदी कहने लगे, देखो, वह उस से कैसी प्रीति रखता था।
37 परन्तु उन में से कितनों ने कहा, क्या यह जिस ने अन्धे की आंखें खोली, यह भी न कर सका कि यह मनुष्य न मरता
38 बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट मन में फिर बहुत ही उदास होकर कब्र पर आया, वह एक गुफा थी, और एक पत्थर उस पर धरा था।
39 बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने कहा; पत्थर को उठाओ: उस मरे हुए की बहिन मारथा उस से कहने लगी, हेबर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट , उस में से अब तो र्दुगंध आती है क्योंकि उसे मरे चार दिन हो गए।
40 बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने उस से कहा, क्या मैं ने तुझ से न कहा था कि यदि तू विश्वास करेगी, तो बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट की महिमा को देखेगी।
41 तब उन्होंने उस पत्थर को हटाया, फिर बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने आंखें उठाकर कहा, हे पिता, मैं तेरा धन्यवाद करता हूं कि तू ने मेरी सुन ली है।
42 और मै जानता था, कि तू सदा मेरी सुनता है, परन्तु जो भीड़ आस पास खड़ी है, उन के कारण मैं ने यह कहा, जिस से कि वे विश्वास करें, कि तू ने मुझे भेजा है।
43 यह कहकर उस ने बड़े शब्द से पुकारा, कि हे लाजर, निकल आ।
44 जो मर गया था, वह कफन से हाथ पांव बन्धे हुए निकल आया और उसका मुंह अंगोछे से लिपटा हुआ तें बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने उन से कहा, उसे खोलकर जाने दो॥
45 तब जो यहूदी मरियम के पास आए थे, और उसका यह काम देखा था, उन में से बहुतों ने उस पर विश्वास किया।
46 परन्तु उन में से कितनों ने फरीसियों के पास जाकर बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट के कामों का समाचार दिया॥
47 इस पर महायाजकों और फरीसियों ने मुख्य सभा के लोगों को इकट्ठा करके कहा, हम करते क्या हैं? यह मनुष्य तो बहुत चिन्ह दिखाता है।
48 यदि हम उसे यों ही छोड़ दे, तो सब उस पर विश्वास ले आएंगे और रोमी आकर हमारी जगह और जाति दोनों पर अधिकार कर लेंगे।
49 तब उन में से काइफा नाम एक व्यक्ति ने जो उस वर्ष का महायाजक था, उन से कहा, तुम कुछ नहीं जानते।
50 और न यह सोचते हो, कि तुम्हारे लिये यह भला है, कि हमारे लोगों के लिये एक मनुष्य मरे, और न यह, कि सारी जाति नाश हो।
51 यह बात उस ने अपनी ओर से न कही, परन्तु उस वर्ष का महायाजक होकर भविष्यद्वणी की, कि बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट उस जाति के लिये मरेगा।
52 और न केवल उस जाति के लिये, वरन इसलिये भी, कि बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट की तित्तर बित्तर सन्तानों को एक कर दे।
53 सो उसी दिन से वे उसके मार डालने की सम्मति करने लगे॥
54 इसलिये बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट उस समय से यहूदियों में प्रगट होकर न फिरा; परन्तु वहां से जंगल के निकट के देश में इफ्राईम नाम, एक नगर को चला गया; और अपने चेलों के साथ वहीं रहने लगा।
55 और यहूदियों का फसह निकट था, और बहुतेरे लोग फसह से पहिले देहात से यरूशलेम को गए कि अपने आप को शुद्ध करें।
56 सो वे बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट को ढूंढ़ने और मन्दिर में खड़े होकर आपस में कहने लगे, तुम क्या समझते हो
57 क्या वह पर्व में नहीं आएगा? और महायाजकों और फरीसियों ने भी आज्ञा दे रखी थी, कि यदि कोई यह जाने कि बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट कहां है तो बताए, कि उसे पकड़ लें॥

अध्याय 12

फिर बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट फतह से छ: दिन पहिले बैतनिय्याह में आया, जहां लाजर था: जिसे बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने मरे हुओं में से जिलाया था।
वहां उन्होंने उसके लिये भोजन तैयार किया, और मारथा सेवा कर रही थी, और लाजर उन में से एक था, जो उसके साथ भोजन करने के लिये बैठे थे।
तब मरियम ने जटामासी का आध सेर बहुमूल्य इत्र लेकर बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट के पावों पर डाला, और अपने बालों से उसके पांव पोंछे, और इत्र की सुगंध से घर सुगन्धित हो गया।
परन्तु उसके चेलों में से यहूदा इस्करियोती नाम एक चेला जो उसे पकड़वाने पर था, कहने लगा।
यह इत्र तीन सौ दीनार में बेचकर कंगालों को क्यों न दिया गया?
उस ने यह बात इसलिये न कही, कि उसे कंगालों की चिन्ता थी, परन्तु इसलिये कि वह चोर था और उसके पास उन की थैली रहती थी, और उस में जो कुछ डाला जाता था, वह निकाल लेता था।
बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने कहा, उसे मेरे गाड़े जाने के दिन के लिये रहने दे।
क्योंकि कंगाल तो तुम्हारे साथ सदा रहते हैं, परन्तु मैं तुम्हारे साथ सदा न रहूंगा॥
यहूदियों में से साधारण लोग जान गए, कि वह वहां है, और वे न केवल बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट के कारण आए परन्तु इसलिये भी कि लाजर को देंखें, जिसे उस ने मरे हुओं में से जिलाया था।
10 तब महायाजकों ने लाजर को भी मार डालने की सम्मति की।
11 क्योंकि उसके कारण बहुत से यहूदी चले गए, और बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट पर विश्वास किया॥
12 दूसरे दिन बहुत से लोगों ने जो पर्व में आए थे, यह सुनकर, कि बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट यरूशलेम में आता है।
13 खजूर की, डालियां लीं, और उस से भेंट करने को निकले, और पुकारने लगे, कि होशाना, धन्य इस्त्राएल का राजा, जोबर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट के नाम से आता है।
14 जब बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट को एक गदहे का बच्चा मिला, तो उस पर बैठा।
15 जैसा लिखा है, कि हे सिय्योन की बेटी, मत डर, देख, तेरा राजा गदहे के बच्चा पर चढ़ा हुआ चला आता है।
16 उसके चेले, ये बातें पहिले न समझे थे; परन्तु जब बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट की महिमा प्रगट हुई, तो उन को स्मरण आया, कि ये बातें उसके विषय में लिखी हुई थीं; और लोगों ने उस से इस प्रकार का व्यवहार किया था।
17 तब भीड़ के लोगों ने जो उस समय उसके साथ थे यह गवाही दी कि उस ने लाजर को कब्र में से बुलाकर, मरे हुओं में से जिलाया था।
18 इसी कारण लोग उस से भेंट करने को आए थे क्योंकि उन्होंने सुना था, कि उस ने यह आश्चर्यकर्म दिखाया है।
19 तब फरीसियों ने आपस में कहा, सोचो तो सही कि तुम से कुछ नहीं बन पड़ता: देखो, संसार उसके पीछे हो चला है॥
20 जो लोग उस पर्व में भजन करने आए थे उन में से कई यूनानी थे।
21 उन्होंने गलील के बैतसैदा के रहने वाले फिलेप्पुस के पास आकर उस से बिनती की, कि श्रीमान् हम बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट से भेंट करना चाहते हैं।
22 फिलेप्पुस ने आकर अन्द्रियास से कहा; तब अन्द्रियास और फिलेप्पुस ने बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट से कहा।
23 इस पर बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने उन से कहा, वह समय आ गया है, कि मनुष्य के पुत्र कि महिमा हो।
24 मैं तुम से सच सच कहता हूं, कि जब तक गेहूं का दाना भूमि में पड़कर मर नहीं जाता, वह अकेला रहता है परन्तु जब मर जाता है, तो बहुत फल लाता है।
25 जो अपने प्राण को प्रिय जानता है, वह उसे खो देता है; और जो इस जगत में अपने प्राण को अप्रिय जानता है; वह अनन्त जीवन के लिये उस की रक्षा करेगा।
26 यदि कोई मेरी सेवा करे, तो मेरे पीछे हो ले; और जहां मैं हूं वहां मेरा सेवक भी होगा; यदि कोई मेरी सेवा करे, तो पिता उसका आदर करेगा।
27 जब मेरा जी व्याकुल हो रहा है। इसलिये अब मैं क्या कहूं? हे पिता, मुझे इस घड़ी से बचा? परन्तु मैं इसी कारण इस घड़ी को पहुंचा हूं।
28 हे पिता अपने नाम की महिमा कर: तब यह आकाशवाणी हुई, कि मैं ने उस की महिमा की है, और फिर भी करूंगा।
29 तब जो लोग खड़े हुए सुन रहे थे, उन्होंने कहा; कि बादल गरजा, औरों ने कहा, कोई स्वर्गदूत उस से बोला।
30 इस पर बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने कहा, यह शब्द मेरे लिये नहीं परन्तु तुम्हारे लिये आया है।
31 अब इस जगत का न्याय होता है, अब इस जगत का सरदार निकाल दिया जाएगा।
32 और मैं यदि पृथ्वी पर से ऊंचे पर चढ़ाया जाऊंगा, तो सब को अपने पास खीचूंगा।
33 ऐसा कहकर उस ने यह प्रगट कर दिया, कि वह कैसी मृत्यु से मरेगा।
34 इस पर लोगों ने उस से कहा, कि हम ने व्यवस्था की यह बात सुनी है, कि मसीह सर्वदा रहेगा, फिर तू क्यों कहता है, कि मनुष्य के पुत्र को ऊंचे पर चढ़ाया जाना अवश्य है?
35 यह मनुष्य का पुत्र कौन है? बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने उन से कहा, ज्योति अब थोड़ी देर तक तुम्हारे बीच में है, जब तक ज्योति तुम्हारे साथ है तब तक चले चलो; ऐसा न हो कि अन्धकार तुम्हें आ घेरे; जो अन्धकार में चलता है वह नहीं जानता कि किधर जाता है।
36 जब तक ज्योति तुम्हारे साथ है, ज्योति पर विश्वास करो कि तुम ज्योति के सन्तान होओ॥ ये बातें कहकर बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट चला गया और उन से छिपा रहा।
37 और उस ने उन के साम्हने इतने चिन्ह दिखाए, तौभी उन्होंने उस पर विश्वास न किया।
38 ताकि यशायाह भविष्यद्वक्ता का वचन पूरा हो जो उस ने कहा कि हेबर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट हमारे समाचार की किस ने प्रतीति की है? औरबर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट का भुजबल किस पर प्रगट हुआ?
39 इस कारण वे विश्वास न कर सके, क्योंकि यशायाह ने फिर भी कहा।
40 कि उस ने उन की आंखें अन्धी, और उन का मन कठोर किया है; कहीं ऐसा न हो, कि आंखों से देखें, और मन से समझें, और फिरें, और मैं उन्हें चंगा करूं।
41 यशायाह ने ये बातें इसलिये कहीं, कि उस ने उस की महिमा देखी; और उस ने उसके विषय में बातें कीं।
42 तौभी सरदारों में से भी बहुतों ने उस पर विश्वास किया, परन्तु फरीसियों के कारण प्रगट में नहीं मानते थे, ऐसा न हो कि आराधनालय में से निकाले जाएं।
43 क्योंकि मनुष्यों की प्रशंसा उन को बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट की प्रशंसा से अधिक प्रिय लगती थी॥
44 बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने पुकारकर कहा, जो मुझ पर विश्वास करता है, वह मुझ पर नहीं, वरन मेरे भेजने वाले पर विश्वास करता है।
45 और जो मुझे देखता है, वह मेरे भेजने वाले को देखता है।
46 मैं जगत में ज्योति होकर आया हूं ताकि जो कोई मुझ पर विश्वास करे, वह अन्धकार में न रहे।
47 यदि कोई मेरी बातें सुनकर न माने, तो मैं उसे दोषी नहीं ठहराता, क्योंकि मैं जगत को दोषी ठहराने के लिये नहीं, परन्तु जगत का उद्धार करने के लिये आया हूं।
48 जो मुझे तुच्छ जानता है और मेरी बातें ग्रहण नहीं करता है उस को दोषी ठहराने वाला तो एक है: अर्थात जो वचन मैं ने कहा है, वही पिछले दिन में उसे दोषी ठहराएगा।
49 क्योंकि मैं ने अपनी ओर से बातें नहीं कीं, परन्तु पिता जिस ने मुझे भेजा है उसी ने मुझे आज्ञा दी है, कि क्या क्या कहूं और क्या क्या बोलूं
50 और मैं जानता हूं, कि उस की आज्ञा अनन्त जीवन है इसलिये मैं जो बोलता हूं, वह जैसा पिता ने मुझ से कहा है वैसा ही बोलता हूं॥

अध्याय 13

फसह के पर्व से पहिले जब बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने जान लिया, कि मेरी वह घड़ी आ पहुंची है कि जगत छोड़कर पिता के पास जाऊं, तो अपने लोगों से, जो जगत में थे, जैसा प्रेम वह रखता था, अन्त तक वैसा ही प्रेम रखता रहा।
और जब शैतान शमौन के पुत्र यहूदा इस्करियोती के मन में यह डाल चुका था, कि उसे पकड़वाए, तो भोजन के समय।
बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने यह जानकर कि पिता ने सब कुछ मेरे हाथ में कर दिया है और मैं बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट के पास से आया हूं, और बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट के पास जाता हूं।
भोजन पर से उठकर अपने कपड़े उतार दिए, और अंगोछा लेकर अपनी कमर बान्धी।
तब बरतन में पानी भरकर चेलों के पांव धोने और जिस अंगोछे से उस की कमर बन्धी थी उसी से पोंछने लगा।
जब वह शमौन पतरस के पास आया: तब उस ने उस से कहा, हेबर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ,
क्या तू मेरे पांव धोता है? बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने उस को उत्तर दिया, कि जो मैं करता हूं, तू अब नहीं जानता, परन्तु इस के बाद समझेगा।
पतरस ने उस से कहा, तू मेरे पांव कभी न धोने पाएगा: यह सुनकर बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने उस से कहा, यदि मैं तुझे न धोऊं, तो मेरे साथ तेरा कुछ भी साझा नहीं।
शमौन पतरस ने उस से कहा, हेबर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट , तो मेरे पांव ही नहीं, वरन हाथ और सिर भी धो दे।
10 बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने उस से कहा, जो नहा चुका है, उसे पांव के सिवा और कुछ धोने का प्रयोजन नहीं; परन्तु वह बिलकुल शुद्ध है: और तुम शुद्ध हो; परन्तु सब के सब नहीं।
11 वह तो अपने पकड़वाने वाले को जानता था इसी लिये उस ने कहा, तुम सब के सब शुद्ध नहीं॥
12 जब वह उन के पांव धो चुका और अपने कपड़े पहिनकर फिर बैठ गया तो उन से कहने लगा, क्या तुम समझे कि मैं ने तुम्हारे साथ क्या किया?
13 तुम मुझे गुरू, औरबर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट , कहते हो, और भला कहते हो, क्योंकि मैं वही हूं।
14 यदि मैं नेबर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट और गुरू होकर तुम्हारे पांव धोए; तो तुम्हें भी एक दुसरे के पांव धोना चाहिए।
15 क्योंकि मैं ने तुम्हें नमूना दिखा दिया है, कि जैसा मैं ने तुम्हारे साथ किया है, तुम भी वैसा ही किया करो।
16 मैं तुम से सच सच कहता हूं, दास अपने स्वामी से बड़ा नहीं; और न भेजा हुआ अपने भेजने वाले से।
17 तुम तो ये बातें जानते हो, और यदि उन पर चलो, तो धन्य हो।
18 मैं तुम सब के विषय में नहीं कहता: जिन्हें मैं ने चुन लिया है, उन्हें मैं जानता हूं: परन्तु यह इसलिये है, कि पवित्र शास्त्र का यह वचन पूरा हो, कि जो मेरी रोटी खाता है, उस ने मुझ पर लात उठाई।
19 अब मैं उसके होने से पहिले तुम्हें जताए देता हूं कि जब हो जाए तो तुम विश्वास करो कि मैं वहीं हूं।
20 मैं तुम से सच सच कहता हूं, कि जो मेरे भेजे हुए को ग्रहण करता है, वह मुझे ग्रहण करता है, और जो मुझे ग्रहण करता है, वह मेरे भेजने वाले को ग्रहण करता है॥
21 ये बातें कहकर बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट आत्मा में व्याकुल हुआ और यह गवाही दी, कि मैं तुम से सच सच कहता हूं, कि तुम में से एक मुझे पकड़वाएगा।
22 चेले यह संदेह करते हुए, कि वह किस के विषय में कहता है, एक दूसरे की ओर देखने लगे।
23 उसके चेलों में से एक जिस से बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट प्रेम रखता था, बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट की छाती की ओर झुका हुआ बैठा था।
24 तब शमौन पतरस ने उस की ओर सैन करके पूछा, कि बता तो, वह किस के विषय में कहता है
25 तब उस ने उसी तरह बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट की छाती की ओर झुक कर पूछा, हेबर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट , वह कौन है? बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने उत्तर दिया, जिसे मैं यह रोटी का टुकड़ा डुबोकर दूंगा, वही है।
26 और उस ने टुकड़ा डुबोकर शमौन के पुत्र यहूदा इस्करियोती को दिया।
27 और टुकड़ा लेते ही शैतान उस में समा गया: तब बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने उस से कहा, जो तू करता है, तुरन्त कर।
28 परन्तु बैठने वालों में से किसी ने न जाना कि उस ने यह बात उस से किस लिये कही।
29 यहूदा के पास थैली रहती थी, इसलिये किसी किसी ने समझा, कि बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट उस से कहता है, कि जो कुछ हमें पर्व के लिये चाहिए वह मोल ले, या यह कि कंगालों को कुछ दे।
30 तब वह टुकड़ा लेकर तुरन्त बाहर चला गया, और रात्रि का समय था॥
31 जब वह बाहर चला गया तो बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने कहा; अब मनुष्य पुत्र की महिमा हुई, और बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट की महिमा उस में हुई।
32 और बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट भी अपने में उस की महिमा करेगा, वरन तुरन्त करेगा।
33 हे बाल को, मैं और थोड़ी देर तुम्हारे पास हूं: फिर तुम मुझे ढूंढोगे, और जैसा मैं ने यहूदियों से कहा, कि जहां मैं जाता हूं, वहां तुम नहीं आ सकते वैसा ही मैं अब तुम से भी कहता हूं।
34 मैं तुम्हें एक नई आज्ञा देता हूं, कि एक दूसरे से प्रेम रखो: जैसा मैं ने तुम से प्रेम रखा है, वैसा ही तुम भी एक दुसरे से प्रेम रखो।
35 यदि आपस में प्रेम रखोगे तो इसी से सब जानेंगे, कि तुम मेरे चेले हो॥
36 शमौन पतरस ने उस से कहा, हेबर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट , तू कहां जाता है बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने उत्तर दिया, कि जहां मैं जाता हूं, वहां तू अब मेरे पीछे आ नहीं सकता! परन्तु इस के बाद मेरे पीछे आएगा।
37 पतरस ने उस से कहा, हेबर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट , अभी मैं तेरे पीछे क्यों नहीं आ सकता? मैं तो तेरे लिये अपना प्राण दूंगा।
38 बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने उत्तर दिया, क्या तू मेरे लिये अपना प्राण देगा? मैं तुझ से सच सच कहता हूं कि मुर्ग बांग न देगा जब तक तू तीन बार मेरा इन्कार न कर लेगा।

अध्याय 14

तुम्हारा मन व्याकुल न हो, तुम बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट पर विश्वास रखते हो मुझ पर भी विश्वास रखो।
मेरे पिता के घर में बहुत से रहने के स्थान हैं, यदि न होते, तो मैं तुम से कह देता क्योंकि मैं तुम्हारे लिये जगह तैयार करने जाता हूं।
और यदि मैं जाकर तुम्हारे लिये जगह तैयार करूं, तो फिर आकर तुम्हें अपने यहां ले जाऊंगा, कि जहां मैं रहूं वहां तुम भी रहो।
और जहां मैं जाता हूं तुम वहां का मार्ग जानते हो।
थोमा ने उस से कहा, हेबर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट , हम नहीं जानते कि तू हां जाता है तो मार्ग कैसे जानें?
बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने उस से कहा, मार्ग और सच्चाई और जीवन मैं ही हूं; बिना मेरे द्वारा कोई पिता के पास नहीं पहुंच सकता।
यदि तुम ने मुझे जाना होता, तो मेरे पिता को भी जानते, और अब उसे जानते हो, और उसे देखा भी है।
फिलेप्पुस ने उस से कहा, हेबर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट , पिता को हमें दिखा दे: यही हमारे लिये बहुत है।
बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने उस से कहा; हे फिलेप्पुस, मैं इतने दिन से तुम्हारे साथ हूं, और क्या तू मुझे नहीं जानता? जिस ने मुझे देखा है उस ने पिता को देखा है: तू क्यों कहता है कि पिता को हमें दिखा।
10 क्या तू प्रतीति नहीं करता, कि मैं पिता में हूं, और पिता मुझ में हैं? ये बातें जो मैं तुम से कहता हूं, अपनी ओर से नहीं कहता, परन्तु पिता मुझ में रहकर अपने काम करता है।
11 मेरी ही प्रतीति करो, कि मैं पिता में हूं; और पिता मुझ में है; नहीं तो कामों ही के कारण मेरी प्रतीति करो।
12 मैं तुम से सच सच कहता हूं, कि जो मुझ पर विश्वास रखता है, ये काम जो मैं करता हूं वह भी करेगा, वरन इन से भी बड़े काम करेगा, क्योंकि मैं पिता के पास जाता हूं।
13 और जो कुछ तुम मेरे नाम से मांगोगे, वही मैं करूंगा कि पुत्र के द्वारा पिता की महिमा हो।
14 यदि तुम मुझ से मेरे नाम से कुछ मांगोगे, तो मैं उसे करूंगा।
15 यदि तुम मुझ से प्रेम रखते हो, तो मेरी आज्ञाओं को मानोगे।
16 और मैं पिता से बिनती करूंगा, और वह तुम्हें एक और सहायक देगा, कि वह सर्वदा तुम्हारे साथ रहे।
17 अर्थात सत्य का आत्मा, जिसे संसार ग्रहण नहीं कर सकता, क्योंकि वह न उसे देखता है और न उसे जानता है: तुम उसे जानते हो, क्योंकि वह तुम्हारे साथ रहता है, और वह तुम में होगा।
18 मैं तुम्हें अनाथ न छोडूंगा, मैं तुम्हारे पास आता हूं।
19 और थोड़ी देर रह गई है कि फिर संसार मुझे न देखेगा, परन्तु तुम मुझे देखोगे, इसलिये कि मैं जीवित हूं, तुम भी जीवित रहोगे।
20 उस दिन तुम जानोगे, कि मैं अपने पिता में हूं, और तुम मुझ में, और मैं तुम में।
21 जिस के पास मेरी आज्ञा है, और वह उन्हें मानता है, वही मुझ से प्रेम रखता है, और जो मुझ से प्रेम रखता है, उस से मेरा पिता प्रेम रखेगा, और मैं उस से प्रेम रखूंगा, और अपने आप को उस पर प्रगट करूंगा।
22 उस यहूदा ने जो इस्करियोती न था, उस से कहा, हेबर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट , क्या हुआ की तू अपने आप को हम पर प्रगट किया चाहता है, और संसार पर नहीं।
23 बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने उस को उत्तर दिया, यदि कोई मुझ से प्रेम रखे, तो वह मेरे वचन को मानेगा, और मेरा पिता उस से प्रेम रखेगा, और हम उसके पास आएंगे, और उसके साथ वास करेंगे।
24 जो मुझ से प्रेम नहीं रखता, वह मेरे वचन नहीं मानता, और जो वचन तुम सुनते हो, वह मेरा नहीं वरन पिता का है, जिस ने मुझे भेजा॥
25 ये बातें मैं ने तुम्हारे साथ रहते हुए तुम से कहीं।
26 परन्तु सहायक अर्थात पवित्र आत्मा जिसे पिता मेरे नाम से भेजेगा, वह तुम्हें सब बातें सिखाएगा, और जो कुछ मैं ने तुम से कहा है, वह सब तुम्हें स्मरण कराएगा।
27 मैं तुम्हें शान्ति दिए जाता हूं, अपनी शान्ति तुम्हें देता हूं; जैसे संसार देता है, मैं तुम्हें नहीं देता: तुम्हारा मन न घबराए और न डरे।
28 तुम ने सुना, कि मैं ने तुम से कहा, कि मैं जाता हूं, और तुम्हारे पास फिर आता हूं: यदि तुम मुझ से प्रेम रखते, तो इस बात से आनन्दित होते, कि मैं पिता के पास जाता हूं क्योंकि पिता मुझ से बड़ा है।
29 और मैं ने अब इस के होने से पहिले तुम से कह दिया है, कि जब वह हो जाए, तो तुम प्रतीति करो।
30 मैं अब से तुम्हारे साथ और बहुत बातें न करूंगा, क्योंकि इस संसार का सरदार आता है, और मुझ में उसका कुछ नहीं।
31 परन्तु यह इसलिये होता है कि संसार जाने कि मैं पिता से प्रेम रखता हूं, और जिस तरह पिता ने मुझे आज्ञा दी, मैं वैसे ही करता हूं: उठो, यहां से चलें॥

अध्याय 15

सच्ची दाखलता मैं हूं; और मेरा पिता किसान है।
जो डाली मुझ में है, और नहीं फलती, उसे वह काट डालता है, और जो फलती है, उसे वह छांटता है ताकि और फले।
तुम तो उस वचन के कारण जो मैं ने तुम से कहा है, शुद्ध हो।
तुम मुझ में बने रहो, और मैं तुम में: जैसे डाली यदि दाखलता में बनी न रहे, तो अपने आप से नहीं फल सकती, वैसे ही तुम भी यदि मुझ में बने न रहो तो नहीं फल सकते।
मैं दाखलता हूं: तुम डालियां हो; जो मुझ में बना रहता है, और मैं उस में, वह बहुत फल फलता है, क्योंकि मुझ से अलग होकर तुम कुछ भी नहीं कर सकते।
यदि कोई मुझ में बना न रहे, तो वह डाली की नाईं फेंक दिया जाता, और सूख जाता है; और लोग उन्हें बटोरकर आग में झोंक देते हैं, और वे जल जाती हैं।
यदि तुम मुझ में बने रहो, और मेरी बातें तुम में बनी रहें तो जो चाहो मांगो और वह तुम्हारे लिये हो जाएगा।
मेरे पिता की महिमा इसी से होती है, कि तुम बहुत सा फल लाओ, तब ही तुम मेरे चेले ठहरोगे।
जैसा पिता ने मुझ से प्रेम रखा, वैसा ही मैं ने तुम से प्रेम रखा, मेरे प्रेम में बने रहो।
10 यदि तुम मेरी आज्ञाओं को मानोगे, तो मेरे प्रेम में बने रहोगे: जैसा कि मैं ने अपने पिता की आज्ञाओं को माना है, और उसके प्रेम में बना रहता हूं।
11 मैं ने ये बातें तुम से इसलिये कही हैं, कि मेरा आनन्द तुम में बना रहे, और तुम्हारा आनन्द पूरा हो जाए।
12 मेरी आज्ञा यह है, कि जैसा मैं ने तुम से प्रेम रखा, वैसा ही तुम भी एक दूसरे से प्रेम रखो।
13 इस से बड़ा प्रेम किसी का नहीं, कि कोई अपने मित्रों के लिये अपना प्राण दे।
14 जो कुछ मैं तुम्हें आज्ञा देता हूं, यदि उसे करो, तो तुम मेरे मित्र हो।
15 अब से मैं तुम्हें दास न कहूंगा, क्योंकि दास नहीं जानता, कि उसका स्वामी क्या करता है: परन्तु मैं ने तुम्हें मित्र कहा है, क्योंकि मैं ने जो बातें अपने पिता से सुनीं, वे सब तुम्हें बता दीं।
16 तुम ने मुझे नहीं चुना परन्तु मैं ने तुम्हें चुना है और तुम्हें ठहराया ताकि तुम जाकर फल लाओ; और तुम्हारा फल बना रहे, कि तुम मेरे नाम से जो कुछ पिता से मांगो, वह तुम्हें दे।
17 इन बातें की आज्ञा मैं तुम्हें इसलिये देता हूं, कि तुम एक दूसरे से प्रेम रखो।
18 यदि संसार तुम से बैर रखता है, तो तुम जानते हो, कि उस ने तुम से पहिले मुझ से भी बैर रखा।
19 यदि तुम संसार के होते, तो संसार अपनों से प्रीति रखता, परन्तु इस कारण कि तुम संसार के नहीं, वरन मैं ने तुम्हें संसार में से चुन लिया है इसी लिये संसार तुम से बैर रखता है।
20 जो बात मैं ने तुम से कही थी, कि दास अपने स्वामी से बड़ा नहीं होता, उस को याद रखो: यदि उन्होंने मुझे सताया, तो तुम्हें भी सताएंगे; यदि उन्होंने मेरी बात मानी, तो तुम्हारी भी मानेंगे।
21 परन्तु यह सब कुछ वे मेरे नाम के कारण तुम्हारे साथ करेंगे क्योंकि वे मेरे भेजने वाले को नहीं जानते।
22 यदि मैं न आता और उन से बातें न करता, तो वे पापी न ठहरते परन्तु अब उन्हें उन के पाप के लिये कोई बहाना नहीं।
23 जो मुझ से बैर रखता है, वह मेरे पिता से भी बैर रखता है।
24 यदि मैं उन में वे काम न करता, जो और किसी ने नहीं किए तो वे पापी नहीं ठहरते, परन्तु अब तो उन्होंने मुझे और मेरे पिता दोनों को देखा, और दोनों से बैर किया।
25 और यह इसलिये हुआ, कि वह वचन पूरा हो, जो उन की व्यवस्था में लिखा है, कि उन्होंने मुझ से व्यर्थ बैर किया।
26 परन्तु जब वह सहायक आएगा, जिसे मैं तुम्हारे पास पिता की ओर से भेजूंगा, अर्थात सत्य का आत्मा जो पिता की ओर से निकलता है, तो वह मेरी गवाही देगा।
27 और तुम भी गवाह हो क्योंकि तुम आरम्भ से मेरे साथ रहे हो॥

अध्याय 16

ये बातें मैं ने तुम से इसलिये कहीं कि तुम ठोकर न खाओ।
वे तुम्हें आराधनालयों में से निकाल देंगे, वरन वह समय आता है, कि जो कोई तुम्हें मार डालेगा वह समझेगा कि मैं बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट की सेवा करता हूं।
और यह वे इसलिये करेंगे कि उन्होंने न पिता को जाना है और न मुझे जानते हैं।
परन्तु ये बातें मैं ने इसलिये तुम से कहीं, कि जब उन का समय आए तो तुम्हें स्मरण आ जाए, कि मैं ने तुम से पहिले ही कह दिया था: और मैं ने आरम्भ में तुम से ये बातें इसलिये नहीं कहीं क्योंकि मैं तुम्हारे साथ था।
अब मैं अपने भेजने वाले के पास जाता हूं और तुम में से कोई मुझ से नहीं पूछता, कि तू कहां जाता है?
परन्तु मैं ने जो ये बातें तुम से कही हैं, इसलिये तुम्हारा मन शोक से भर गया।
तौभी मैं तुम से सच कहता हूं, कि मेरा जाना तुम्हारे लिये अच्छा है, क्योंकि यदि मैं न जाऊं, तो वह सहायक तुम्हारे पास न आएगा, परन्तु यदि मैं जाऊंगा, तो उसे तुम्हारे पास भेज दूंगा।
और वह आकर संसार को पाप और धामिर्कता और न्याय के विषय में निरूत्तर करेगा।
पाप के विषय में इसलिये कि वे मुझ पर विश्वास नहीं करते।
10 और धामिर्कता के विषय में इसलिये कि मैं पिता के पास जाता हूं,
11 और तुम मुझे फिर न देखोगे: न्याय के विषय में इसलिये कि संसार का सरदार दोषी ठहराया गया है।
12 मुझे तुम से और भी बहुत सी बातें कहनी हैं, परन्तु अभी तुम उन्हें सह नहीं सकते।
13 परन्तु जब वह अर्थात सत्य का आत्मा आएगा, तो तुम्हें सब सत्य का मार्ग बताएगा, क्योंकि वह अपनी ओर से न कहेगा, परन्तु जो कुछ सुनेगा, वही कहेगा, और आनेवाली बातें तुम्हें बताएगा।
14 वह मेरी महिमा करेगा, क्योंकि वह मेरी बातों में से लेकर तुम्हें बताएगा।
15 जो कुछ पिता का है, वह सब मेरा है; इसलिये मैं ने कहा, कि वह मेरी बातों में से लेकर तुम्हें बताएगा।
16 थोड़ी देर तुम मुझे न देखोगे, और फिर थोड़ी देर में मुझे देखोगे।
17 तब उसके कितने चेलों ने आपस में कहा, यह क्या है, जो वह हम से कहता है, कि थोड़ी देर में तुम मुझे न देखोगे, और फिर थोड़ी देर में मुझे देखोगे? और यह इसलिये कि मैं कि मैं पिता के पास जाता हूं?
18 तब उन्होंने कहा, यह थोड़ी देर जो वह कहता है, क्या बात है? हम नहीं जानते, कि क्या कहता है।
19 बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने यह जानकर, कि वे मुझ से पूछना चाहते हैं, उन से कहा, क्या तुम आपस में मेरी इस बाते के विषय में पूछ पाछ करते हो, कि थोड़ी देर में तुम मुझे न देखोगे, और फिर थोड़ी देर में मुझे देखोगे।
20 मैं तुम से सच सच कहता हूं; कि तुम रोओगे और विलाप करोगे, परन्तु संसार आनन्द करेगा: तुम्हें शोक होगा, परन्तु तुम्हारा शोक आनन्द बन जाएगा।
21 जब स्त्री जनने लगती है तो उस को शोक होता है, क्योंकि उस की दु:ख की घड़ी आ पहुंची, परन्तु जब वह बालक जन्म चुकी तो इस आनन्द से कि जगत में एक मनुष्य उत्पन्न हुआ, उस संकट को फिर स्मरण नहीं करती।
22 और तुम्हें भी अब तो शोक है, परन्तु मैं तुम से फिर मिलूंगा और तुम्हारे मन में आनन्द होगा; और तुम्हारा आनन्द कोई तुम से छीन न लेगा।
23 उस दिन तुम मुझ से कुछ न पूछोगे: मैं तुम से सच सच कहता हूं, यदि पिता से कुछ मांगोगे, तो वह मेरे नाम से तुम्हें देगा।
24 अब तक तुम ने मेरे नाम से कुछ नहीं मांगा; मांगो तो पाओगे ताकि तुम्हारा आनन्द पूरा हो जाए॥
25 मैं ने ये बातें तुम से दृष्टान्तों में कही हैं, परन्तु वह समय आता है, कि मैं तुम से दृष्टान्तों में और फिर नहीं कहूंगा परन्तु खोलकर तुम्हें पिता के विषय में बताऊंगा।
26 उस दिन तुम मेरे नाम से मांगोगे, और मैं तुम से यह नहीं कहता, कि मैं तुम्हारे लिये पिता से बिनती करूंगा।
27 क्योंकि पिता तो आप ही तुम से प्रीति रखता है, इसलिये कि तुम ने मुझ से प्रीति रखी है, और यह भी प्रतीति की है, कि मैं पिता कि ओर से निकल आया।
28 मैं पिता से निकलकर जगत में आया हूं, फिर जगत को छोड़कर पिता के पास जाता हूं।
29 उसके चेलों ने कहा, देख, अब तो तू खोलकर कहता है, और कोई दृष्टान्त नहीं कहता।
30 अब हम जान गए, कि तू सब कुछ जानता है, और तुझे प्रयोजन नहीं, कि कोई तुझ से पूछे, इस से हम प्रतीति करते हैं, कि तू बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट से निकला है।
31 यह सुन बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने उन से कहा, क्या तुम अब प्रतीति करते हो?
32 देखो, वह घड़ी आती है वरन आ पहुंची कि तुम सब तित्तर बित्तर होकर अपना अपना मार्ग लोगे, और मुझे अकेला छोड़ दोगे, तौभी मंघ अकेला नहीं क्योंकि पिता मेरे साथ है।
33 मैं ने ये बातें तुम से इसलिये कही हैं, कि तुम्हें मुझ में शान्ति मिले; संसार में तुम्हें क्लेश होता है, परन्तु ढाढ़स बांधो, मैं ने संसार को जीन लिया है॥

अध्याय 17

बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने ये बातें कहीं और अपनी आंखे आकाश की ओर उठाकर कहा, हे पिता, वह घड़ी आ पहुंची, अपने पुत्र की महिमा कर, कि पुत्र भी तेरी महिमा करे।
क्योंकि तू ने उस को सब प्राणियों पर अधिकार दिया, कि जिन्हें तू ने उस को दिया है, उन सब को वह अनन्त जीवन दे।
और अनन्त जीवन यह है, कि वे तुझ अद्वैत सच्चे बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट को और बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट मसीह को, जिसे तू ने भेजा है, जाने।
जो काम तू ने मुझे करने को दिया था, उसे पूरा करके मैं ने पृथ्वी पर तेरी महिमा की है।
और अब, हे पिता, तू अपने साथ मेरी महिमा उस महिमा से कर जो जगत के होने से पहिले, मेरी तेरे साथ थी।
मैं ने तेरा नाम उन मनुष्यों पर प्रगट किया जिन्हें तू ने जगत में से मुझे दिया: वे तेरे थे और तू ने उन्हें मुझे दिया और उन्होंने तेरे वचन को मान लिया है।
अब वे जान गए हैं, कि जो कुछ तू ने मुझे दिया है, सब तेरी ओर से है।
क्योंकि जो बातें तू ने मुझे पहुंचा दीं, मैं ने उन्हें उन को पहुंचा दिया और उन्होंने उन को ग्रहण किया: और सच सच जान लिया है, कि मैं तेरी ओर से निकला हूं, और प्रतीति कर ली है कि तू ही ने मुझे भेजा।
मैं उन के लिये बिनती करता हूं, संसार के लिये बिनती नहीं करता हूं परन्तु उन्हीं के लिये जिन्हें तू ने मुझे दिया है, क्योंकि वे तेरे हैं।
10 और जो कुछ मेरा है वह सब तेरा है; और जो तेरा है वह मेरा है; और इन से मेरी महिमा प्रगट हुई है।
11 मैं आगे को जगत में न रहूंगा, परन्तु ये जगत में रहेंगे, और मैं तेरे पास आता हूं; हे पवित्र पिता, अपने उस नाम से जो तू ने मुझे दिया है, उन की रक्षा कर, कि वे हमारी नाईं एक हों।
12 जब मैं उन के साथ था, तो मैं ने तेरे उस नाम से, जो तू ने मुझे दिया है, उन की रक्षा की, मैं ने उन की चौकसी की और विनाश के पुत्र को छोड़ उन में से काई नाश न हुआ, इसलिये कि पवित्र शास्त्र की बात पूरी हो।
13 परन्तु अब मैं तेरे पास आता हूं, और ये बातें जगत में कहता हूं, कि वे मेरा आनन्द अपने में पूरा पाएं।
14 मैं ने तेरा वचन उन्हें पहुंचा दिया है, और संसार ने उन से बैर किया, क्योंकि जैसा मैं संसार का नहीं, वैसे ही वे भी संसार के नहीं।
15 मैं यह बिनती नहीं करता, कि तू उन्हें जगत से उठा ले, परन्तु यह कि तू उन्हें उस दुष्ट से बचाए रख।
16 जैसे मैं संसार का नहीं, वैसे ही वे भी संसार के नहीं।
17 सत्य के द्वारा उन्हें पवित्र कर: तेरा वचन सत्य है।
18 जैसे तू ने जगत में मुझे भेजा, वैसे ही मैं ने भी उन्हें जगत में भेजा।
19 और उन के लिये मैं अपने आप को पवित्र करता हूं ताकि वे भी सत्य के द्वारा पवित्र किए जाएं।
20 मैं केवल इन्हीं के लिये बिनती नहीं करता, परन्तु उन के लिये भी जो इन के वचन के द्वारा मुझ पर विश्वास करेंगे, कि वे सब एक हों।
21 जैसा तू हे पिता मुझ में हैं, और मैं तुझ में हूं, वैसे ही वे भी हम में हों, इसलिये कि जगत प्रतीति करे, कि तू ही ने मुझे भेजा।
22 और वह महिमा जो तू ने मुझे दी, मैं ने उन्हें दी है कि वे वैसे ही एक हों जैसे की हम एक हैं।
23 मैं उन में और तू मुझ में कि वे सिद्ध होकर एक हो जाएं, और जगत जाने कि तू ही ने मुझे भेजा, और जैसा तू ने मुझ से प्रेम रखा, वैसा ही उन से प्रेम रखा।
24 हे पिता, मैं चाहता हूं कि जिन्हें तू ने मुझे दिया है, जहां मैं हूं, वहां वे भी मेरे साथ हों कि वे मेरी उस महिमा को देखें जो तू ने मुझे दी है, क्योंकि तू ने जगत की उत्पत्ति से पहिले मुझ से प्रेम रखा।
25 हे धामिर्क पिता, संसार ने मुझे नहीं जाना, परन्तु मैं ने तुझे जाना और इन्होंने भी जाना कि तू ही ने मुझे भेजा।
26 और मैं ने तेरा नाम उन को बताया और बताता रहूंगा कि जो प्रेम तुझ को मुझ से था, वह उन में रहे और मैं उन में रहूं॥

अध्याय 18

बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ये बातें कहकर अपने चेलों के साथ किद्रोन के नाले के पार गया, वहां एक बारी थी, जिस में वह और उसके चेले गए।
और उसका पकड़वाने वाला यहूदा भी वह जगह जानता था, क्योंकि बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट अपने चेलों के साथ वहां जाया करता था।
तब यहूदा पलटन को और महायाजकों और फरीसियों की ओर से प्यादों को लेकर दीपकों और मशालों और हथियारों को लिए हुए वहां आया।
तब बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट उन सब बातों को जो उस पर आनेवाली थीं, जानकर निकला, और उन से कहने लगा, किसे ढूंढ़ते हो?
उन्होंने उस को उत्तर दिया, बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट नासरी को: बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने उन से कहा, मैं ही हूं: और उसका पकड़वाने वाला यहूदा भी उन के साथ खड़ा था।
उसके यह कहते ही, कि मैं हूं, वे पीछे हटकर भूमि पर गिर पड़े।
तब उस ने फिर उन से पूछा, तुम किस को ढूंढ़ते हो।
वे बोले, बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट नासरी को। बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने उत्तर दिया, मैं तो तुम से कह चुका हूं कि मैं ही हूं, यदि मुझे ढूंढ़ते हो तो इन्हें जाने दो।
यह इसलिये हुआ, कि वह वचन पूरा हो, जो उस ने कहा था कि जिन्हें तू ने मुझे दिया, उन में से मैं ने एक को भी न खोया।
10 शमौन पतरस ने तलवार, जो उसके पास थी, खींची और महायाजक के दास पर चलाकर, उसका दाहिना कान उड़ा दिया, उस दास का नाम मलखुस था।
11 तब बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने पतरस से कहा, अपनी तलवार काठी में रख: जो कटोरा पिता ने मुझे दिया है क्या मैं उसे न पीऊं?
12 तब सिपाहियों और उन के सूबेदार और यहूदियों के प्यादों ने बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट को पकड़कर बान्ध लिया।
13 और पहिले उसे हन्ना के पास ले गए क्योंकि वह उस वर्ष के महायाजक काइफा का ससुर था।
14 यह वही काइफा था, जिस ने यहूदियों को सलाह दी थी कि हमारे लोगों के लिये एक पुरूष का मरना अच्छा है।
15 शमौन पतरस और एक और चेला भी बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट के पीछे हो लिए: यह चेला महायाजक का जाना पहचाना था और बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट के साथ महायाजक के आंगन में गया।
16 परन्तु पतरस बाहर द्वार पर खड़ा रहा, तब वह दूसरा चेला जो महायाजक का जाना पहचाना था, बाहर निकला, और द्वारपालिन से कहकर, पतरस को भीतर ले आया।
17 उस दासी ने जो द्वारपालिन थी, पतरस से कहा, क्या तू भी इस मनुष्य के चेलों में से है? उस ने कहा, मैं नहीं हूं।
18 दास और प्यादे जाड़े के कारण को एले धधकाकर खड़े ताप रहे थे और पतरस भी उन के साथ खड़ा ताप रहा था॥
19 तक महायाजक ने बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट से उसके चेलों के विषय में और उसके उपदेश के विषय में पूछा।
20 बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने उस को उत्तर दिया, कि मैं ने जगत से खोलकर बातें की; मैं ने सभाओं और आराधनालय में जहां सब यहूदी इकट्ठे हुआ करते हैं सदा उपदेश किया और गुप्त में कुछ भी नहीं कहा।
21 तू मुझ से क्यों पूछता है? सुनने वालों से पूछ: कि मैं ने उन से क्या कहा? देख वे जानते हैं; कि मैं ने क्या क्या कहा
22 तब उस ने यह कहा, तो प्यादों में से एक ने जो पास खड़ा था, बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट को थप्पड़ मारकर कहा, क्या तू महायाजक को इस प्रकार उत्तर देता है।
23 बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने उसे उत्तर दिया, यदि मैं ने बुरा कहा, तो उस बुराई पर गवाही दे; परन्तु यदि भला कहा, तो मुझे क्यों मारता है?
24 हन्ना ने उसे बन्धे हुए काइफा महायाजक के पास भेज दिया॥
25 शमौन पतरस खड़ा हुआ ताप रहा था। तब उन्होंने उस से कहा; क्या तू भी उसके चेलों में से है? उस ने इन्कार करके कहा, मैं नहीं हूं।
26 महायाजक के दासों में से एक जो उसके कुटुम्ब में से था, जिसका कान पतरस ने काट डाला था, बोला, क्या मैं ने तुझे उसके साथ बारी में न देखा था?
27 पतरस फिर इन्कार कर गया और तुरन्त मुर्ग ने बांग दी॥
28 और वे बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट को काइफा के पास से किले को ले गए और भोर का समय था, परन्तु वे आप किले के भीतर न गए ताकि अशुद्ध न हों परन्तु फसह खा सकें।
29 तब पीलातुस उन के पास बाहर निकल आया और कहा, तुम इस मनुष्य पर किस बात की नालिश करते हो?
30 उन्होंने उस को उत्तर दिया, कि यदि वह कुकर्मी न होता तो हम उसे तेरे हाथ न सौंपते।
31 पीलातुस ने उन से कहा, तुम ही इसे ले जाकर अपनी व्यवस्था के अनुसार उसका न्याय करो: यहूदियों ने उस से कहा, हमें अधिकार नहीं कि किसी का प्राण लें।
32 यह इसलिये हुआ, कि बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट की वह बात पूरी हो जो उस ने यह पता देते हुए कही थी, कि उसका मरना कैसा होगा॥
33 तब पीलातुस फिर किले के भीतर गया और बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट को बुलाकर, उस से पूछा, क्या तू यहूदियों का राजा है?
34 बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने उत्तर दिया, क्या तू यह बात अपनी ओर से कहता है या औरों ने मेरे विषय में तुझ से कही?
35 पीलातुस ने उत्तर दिया, क्या मैं यहूदी हूं? तेरी ही जाति और महायाजकों ने तुझे मेरे हाथ सौंपा, तू ने क्या किया है?
36 बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने उत्तर दिया, कि मेरा राज्य इस जगत का नहीं, यदि मेरा राज्य इस जगत का होता, तो मेरे सेवक लड़ते, कि मैं यहूदियों के हाथ सौंपा न जाता: परन्तु अब मेरा राज्य यहां का नहीं।
37 पीलातुस ने उस से कहा, तो क्या तू राजा है? बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने उत्तर दिया, कि तू कहता है, क्योंकि मैं राजा हूं; मैं ने इसलिये जन्म लिया, और इसलिये जगत में आया हूं कि सत्य पर गवाही दूं जो कोई सत्य का है, वह मेरा शब्द सुनता है।
38 पीलातुस ने उस से कहा, सत्य क्या है? और यह कहकर वह फिर यहूदियों के पास निकल गया और उन से कहा, मैं तो उस में कुछ दोष नहीं पाता।
39 पर तुम्हारी यह रीति है कि मैं फसह में तुम्हारे लिये एक व्यक्ति को छोड़ दूं सो क्या तुम चाहते हो, कि मैं तुम्हारे लिये यहूदियों के राजा को छोड़ दूं?
40 तब उन्होंने फिर चिल्लाकर कहा, इसे नहीं परन्तु हमारे लिये बरअब्बा को छोड़ दे; और बरअब्बा डाकू था॥

अध्याय 19

इस पर पीलातुस ने बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट को लेकर कोड़े लगवाए।
और सिपाहियों ने कांटों का मुकुट गूंथकर उसके सिर पर रखा, और उसे बैंजनी वस्त्र पहिनाया।
और उसके पास आ आकर कहने लगे, हे यहूदियों के राजा, प्रणाम! और उसे थप्पड़ भी मारे।
तक पीलातुस ने फिर बाहर निकलकर लोगों से कहा, देखो, मैं उसे तुम्हारे पास फिर बाहर लाता हूं; ताकि तुम जानो कि मैं कुछ भी दोष नहीं पाता।
तक बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट कांटों का मुकुट और बैंजनी वस्त्र पहिने हुए बाहर निकला और पीलातुस ने उन से कहा, देखो, यह पुरूष।
जब महायाजकों और प्यादों ने उसे देखा, तो चिल्लाकर कहा, कि उसे क्रूस पर चढ़ा, क्रूस पर: पीलातुस ने उन से कहा, तुम ही उसे लेकर क्रूस पर चढ़ाओ; क्योंकि मैं उस में दोष नहीं पाता।
यहूदियों ने उस को उत्तर दिया, कि हमारी भी व्यवस्था है और उस व्यवस्था के अनुसार वह मारे जाने के योग्य है क्योंकि उस ने अपने आप को बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट का पुत्र बनाया।
जब पीलातुस ने यह बात सुनी तो और भी डर गया।
और फिर किले के भीतर गया और बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट से कहा, तू कहां का है? परन्तु बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने उसे कुछ भी उत्तर न दिया।
10 पीलातुस ने उस से कहा, मुझ से क्यों नहीं बोलता? क्या तू नहीं जानता कि तुझे छोड़ देने का अधिकार मुझे है और तुझे क्रूस पर चढ़ाने का भी मुझे अधिकार है।
11 बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने उत्तर दिया, कि यदि तुझे ऊपर से न दिया जाता, तो तेरा मुझ पर कुछ अधिकार न होता; इसलिये जिस ने मुझे तेरे हाथ पकड़वाया है, उसका पाप अधिक है।
12 इस से पीलातुस ने उसे छोड़ देना चाहा, परन्तु यहूदियों ने चिल्ला चिल्लाकर कहा, यदि तू इस को छोड़ देगा तो तेरी भक्ति कैसर की ओर नहीं; जो कोई अपने आप को राजा बनाता है वह कैसर का साम्हना करता है।
13 ये बातें सुनकर पीलातुस बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट को बाहर लाया और उस जगह एक चबूतरा था जो इब्रानी में गब्बता कहलाता है, और न्याय आसन पर बैठा।
14 यह फसह की तैयारी का दिन था और छठे घंटे के लगभग था: तब उस ने यहूदियों से कहा, देखो, यही है, तुम्हारा राजा!
15 परन्तु वे चिल्लाए कि ले जा! ले जा! उसे क्रूस पर चढ़ा: पीलातुस ने उन से कहा, क्या मैं तुम्हारे राजा को क्रूस पर चढ़ाऊं? महायाजकों ने उत्तर दिया, कि कैसर को छोड़ हमारा और कोई राजा नहीं।
16 तब उस ने उसे उन के हाथ सौंप दिया ताकि वह क्रूस पर चढ़ाया जाए॥
17 तब वे बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट को ले गए। और वह अपना क्रूस उठाए हुए उस स्थान तक बाहर गया, जो खोपड़ी का स्थान कहलाता है और इब्रानी में गुलगुता।
18 वहां उन्होंने उसे और उसके साथ और दो मनुष्यों को क्रूस पर चढ़ाया, एक को इधर और एक को उधर, और बीच में बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट को।
19 और पीलातुस ने एक दोष-पत्र लिखकर क्रूस पर लगा दिया और उस में यह लिखा हुआ था, बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट नासरी यहूदियों का राजा।
20 यह दोष-पत्र बहुत यहूदियों ने पढ़ा क्योंकि वह स्थान जहां बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट क्रूस पर चढ़ाया गया था नगर के पास था और पत्र इब्रानी और लतीनी और यूनानी में लिखा हुआ था।
21 तब यहूदियों के महायाजकों ने पीलातुस से कहा, यहूदियों का राजा मत लिख परन्तु यह कि “उस ने कहा, मैं यहूदियों का राजा हूं”।
22 पीलातुस ने उत्तर दिया, कि मैं ने जो लिख दिया, वह लिख दिया॥
23 जब सिपाही बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट को क्रूस पर चढ़ा चुके, तो उसके कपड़े लेकर चार भाग किए, हर सिपाही के लिये एक भाग और कुरता भी लिया, परन्तु कुरता बिन सीअन ऊपर से नीचे तक बुना हुआ था: इसलिये उन्होंने आपस में कहा, हम इस को न फाडें, परन्तु इस पर चिट्ठी डालें कि वह किस का होगा।
24 यह इसलिये हुआ, कि पवित्र शास्त्र की बात पूरी हो कि उन्होंने मेरे कपड़े आपस में बांट लिये और मेरे वस्त्र पर चिट्ठी डाली: सो सिपाहियों ने ऐसा ही किया।
25 परन्तु बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट के क्रूस के पास उस की माता और उस की माता की बहिन मरियम, क्लोपास की पत्नी और मरियम मगदलीनी खड़ी थी।
26 बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने अपनी माता और उस चेले को जिस से वह प्रेम रखता था, पास खड़े देखकर अपनी माता से कहा; हे नारी, देख, यह तेरा पुत्र है।
27 तब उस चेले से कहा, यह तेरी माता है, और उसी समय से वह चेला, उसे अपने घर ले गया॥
28 इस के बाद बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने यह जानकर कि अब सब कुछ हो चुका; इसलिये कि पवित्र शास्त्र की बात पूरी हो कहा, मैं प्यासा हूं।
29 वहां एक सिरके से भरा हुआ बर्तन धरा था, सो उन्होंने सिरके में भिगोए हुए इस्पंज को जूफे पर रखकर उसके मुंह से लगाया।
30 जब बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने वह सिरका लिया, तो कहा पूरा हुआ और सिर झुकाकर प्राण त्याग दिए॥
31 और इसलिये कि वह तैयारी का दिन था, यहूदियों ने पीलातुस से बिनती की कि उन की टांगे तोड़ दी जाएं और वे उतारे जाएं ताकि सब्त के दिन वे क्रूसों पर न रहें, क्योंकि वह सब्त का दिन बड़ा दिन था।
32 सो सिपाहियों ने आकर पहिले की टांगें तोड़ीं तब दूसरे की भी, जो उसके साथ क्रूसों पर चढ़ाए गए थे।
33 परन्तु जब बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट के पास आकर देखा कि वह मर चुका है, तो उस की टांगें न तोड़ीं।
34 परन्तु सिपाहियों में से एक ने बरछे से उसका पंजर बेधा और उस में से तुरन्त लोहू और पानी निकला।
35 जिस ने यह देखा, उसी ने गवाही दी है, और उस की गवाही सच्ची है; और वह जानता है, कि सच कहता है कि तुम भी विश्वास करो।
36 ये बातें इसलिये हुईं कि पवित्र शास्त्र की यह बात पूरी हो कि उस की कोई हड्डी तोड़ी न जाएगी।
37 फिर एक और स्थान पर यह लिखा है, कि जिसे उन्होंने बेधा है, उस पर दृष्टि करेंगे॥
38 इन बातों के बाद अरमतियाह के यूसुफ ने, जो बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट का चेला था, ( परन्तु यहूदियों के डर से इस बात को छिपाए रखता था), पीलातुस से बिनती की, कि मैं बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट की लोथ को ले जाऊं, और पीलातुस ने उस की बिनती सुनी, और वह आकर उस की लोथ ले गया।
39 निकुदेमुस भी जो पहिले बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट के पास रात को गया था पचास सेर के लगभग मिला हुआ गन्धरस और एलवा ले आया।
40 तब उन्होंने बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट की लोथ को लिया और यहूदियों के गाड़ने की रीति के अनुसार उसे सुगन्ध द्रव्य के साथ कफन में लपेटा।
41 उस स्थान पर जहां बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट क्रूस पर चढ़ाया गया था, एक बारी थी; और उस बारी में एक नई कब्र थी; जिस में कभी कोई न रखा गया था।
42 सो यहूदियों की तैयारी के दिन के कारण, उन्होंने बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट को उसी में रखा, क्योंकि वह कब्र निकट थी॥

अध्याय 20

सप्ताह के पहिले दिन मरियम मगदलीनी भोर को अंधेरा रहते ही कब्र पर आई, और पत्थर को कब्र से हटा हुआ देखा।
तब वह दौड़ी और शमौन पतरस और उस दूसरे चेले के पास जिस से बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट प्रेम रखता था आकर कहा, वेबर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट को कब्र में से निकाल ले गए हैं; और हम नहीं जानतीं, कि उसे कहां रख दिया है।
तब पतरस और वह दूसरा चेला निकलकर कब्र की ओर चले।
और दोनों साथ साथ दौड़ रहे थे, परन्तु दूसरा चेला पतरस से आगे बढ़कर कब्र पर पहिले पहुंचा।
और झुककर कपड़े पड़े देखे: तौभी वह भीतर न गया।
तब शमौन पतरस उसके पीछे पीछे पहुंचा और कब्र के भीतर गया और कपड़े पड़े देखे।
और वह अंगोछा जो उसके सिर से बन्धा हुआ था, कपड़ों के साथ पड़ा हुआ नहीं परन्तु अलग एक जगह लपेटा हुआ देखा।
तब दूसरा चेला भी जो कब्र पर पहिले पहुंचा था, भीतर गया और देखकर विश्वास किया।
वे तो अब तक पवित्र शास्त्र की वह बात न समझते थे, कि उसे मरे हुओं में से जी उठना होगा।
10 तब ये चेले अपने घर लौट गए।
11 परन्तु मरियम रोती हुई कब्र के पास ही बाहर खड़ी रही और रोते रोते कब्र की ओर झुककर,
12 दो स्वर्गदूतों को उज्ज़वल कपड़े पहिने हुए एक को सिरहाने और दूसरे को पैताने बैठे देखा, जहां बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट की लोथ पड़ी थी।
13 उन्होंने उस से कहा, हे नारी, तू क्यों रोती है? उस ने उन से कहा, वे मेरेबर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट को उठा ले गए और मैं नहीं जानती कि उसे कहां रखा है।
14 यह कहकर वह पीछे फिरी और बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट को खड़े देखा और न पहचाना कि यह बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट है।
15 बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने उस से कहा, हे नारी तू क्यों रोती है? किस को ढूंढ़ती है? उस ने माली समझकर उस से कहा, हे महाराज, यदि तू ने उसे उठा लिया है तो मुझ से कह कि उसे कहां रखा है और मैं उसे ले जाऊंगी।
16 बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने उस से कहा, मरियम! उस ने पीछे फिरकर उस से इब्रानी में कहा, रब्बूनी अर्थात हे गुरू।
17 बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने उस से कहा, मुझे मत छू क्योंकि मैं अब तक पिता के पास ऊपर नहीं गया, परन्तु मेरे भाइयों के पास जाकर उन से कह दे, कि मैं अपने पिता, और तुम्हारे पिता, और अपने बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट और तुम्हारे बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट के पास ऊपर जाता हूं।
18 मरियम मगदलीनी ने जाकर चेलों को बताया, कि मैं नेबर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट को देखा और उस ने मुझ से ये बातें कहीं॥
19 उसी दिन जो सप्ताह का पहिला दिन था, सन्ध्या के समय जब वहां के द्वार जहां चेले थे, यहूदियों के डर के मारे बन्द थे, तब बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट आया और बीच में खड़ा होकर उन से कहा, तुम्हें शान्ति मिले।
20 और यह कहकर उस ने अपना हाथ और अपना पंजर उन को दिखाए: तब चेलेबर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट को देखकर आनन्दित हुए।
21 बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने फिर उन से कहा, तुम्हें शान्ति मिले; जैसे पिता ने मुझे भेजा है, वैसे ही मैं भी तुम्हें भेजता हूं।
22 यह कहकर उस ने उन पर फूंका और उन से कहा, पवित्र आत्मा लो।
23 जिन के पाप तुम क्षमा करो वे उन के लिये क्षमा किए गए हैं जिन के तुम रखो, वे रखे गए हैं॥
24 परन्तु बारहों में से एक व्यक्ति अर्थात थोमा जो दिदुमुस कहलाता है, जब बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट आया तो उन के साथ न था।
25 जब और चेले उस से कहने लगे कि हम नेबर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट को देखा है: तब उस ने उन से कहा, जब तक मैं उस के हाथों में कीलों के छेद न देख लूं, और कीलों के छेदों में अपनी उंगली न डाल लूं, और उसके पंजर में अपना हाथ न डाल लूं, तब तक मैं प्रतीति नहीं करूंगा॥
26 आठ दिन के बाद उस के चेले फिर घर के भीतर थे, और थोमा उन के साथ था, और द्वार बन्द थे, तब बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने आकर और बीच में खड़ा होकर कहा, तुम्हें शान्ति मिले।
27 तब उस ने थोमा से कहा, अपनी उंगली यहां लाकर मेरे हाथों को देख और अपना हाथ लाकर मेरे पंजर में डाल और अविश्वासी नहीं परन्तु विश्वासी हो।
28 यह सुन थोमा ने उत्तर दिया, हे मेरेबर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट , हे मेरे बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट !
29 बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने उस से कहा, तू ने तो मुझे देखकर विश्वास किया है, धन्य वे हैं जिन्हों ने बिना देखे विश्वास किया॥
30 बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने और भी बहुत चिन्ह चेलों के साम्हने दिखाए, जो इस पुस्तक में लिखे नहीं गए।
31 परन्तु ये इसलिये लिखे गए हैं, कि तुम विश्वास करो, कि बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ही बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट का पुत्र मसीह है: और विश्वास करके उसके नाम 

अध्याय 21

इन बातों के बाद बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने अपने आप को तिबिरियास झील के किनारे चेलों पर प्रगट किया और इस रीति से प्रगट किया।
शमौन पतरस और थोमा जो दिदुमुस कहलाता है, और गलील के काना नगर का नतनएल और जब्दी के पुत्र, और उसके चेलों में से दो और जन इकट्ठे थे।
शमौन पतरस ने उन से कहा, मैं मछली पकड़ने को जाता हूं: उन्होंने उस से कहा, हम भी तेरे साथ चलते हैं: सो वे निकलकर नाव पर चढ़े, परन्तु उस रात कुछ न पकड़ा।
भोर होते ही बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट किनारे पर खड़ा हुआ; तौभी चेलों ने न पहचाना कि यह बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट है।
तब बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने उन से कहा, हे बाल को, क्या तुम्हारे पास कुछ खाने को है? उन्होंने उत्तर दिया कि नहीं।
उस ने उन से कहा, नाव की दाहनी ओर जाल डालो, तो पाओगे, तब उन्होंने जाल डाला, और अब मछिलयों की बहुतायत के कारण उसे खींच न सके।
इसलिये उस चेले ने जिस से बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट प्रेम रखता था पतरस से कहा, यह तोबर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट है: शमौन पतरस ने यह सुनकर किबर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट है, कमर में अंगरखा कस लिया, क्योंकि वह नंगा था, और झील में कूद पड़ा।
परन्तु और चेले डोंगी पर मछिलयों से भरा हुआ जाल खींचते हुए आए, क्योंकि वे किनारे से अधिक दूर नहीं, कोई दो सौ हाथ पर थे।
जब किनारे पर उतरे, तो उन्होंने कोएले की आग, और उस पर मछली रखी हुई, और रोटी देखी।
10 बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने उन से कहा, जो मछिलयां तुम ने अभी पकड़ी हैं, उन में से कुछ लाओ।
11 शमौन पतरस ने डोंगी पर चढ़कर एक सौ तिर्पन बड़ी मछिलयों से भरा हुआ जाल किनारे पर खींचा, और इतनी मछिलयां होने से भी जाल न फटा।
12 बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने उन से कहा, कि आओ, भोजन करो और चेलों में से किसी को हियाव न हुआ, कि उस से पूछे, कि तू कौन है? क्योंकि वे जानते थे, कि हो न हो यहबर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ही है।
13 बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट आया, और रोटी लेकर उन्हें दी, और वैसे ही मछली भी।
14 यह तीसरी बार है, कि बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने मरे हुओं में से जी उठने के बाद चेलों को दर्शन दिए॥
15 भोजन करने के बाद बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने शमौन पतरस से कहा, हे शमौन, सरपंच पति बजरंग बघेल - भगवानदादा के पुत्र, क्या तू इन से बढ़कर मुझ से प्रेम रखता है? उस ने उस से कहा, हांबर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट तू तो जानता है, कि मैं तुझ से प्रीति रखता हूं: उस ने उस से कहा, मेरे मेमनों को चरा।
16 उस ने फिर दूसरी बार उस से कहा, हे शमौन सरपंच पति बजरंग बघेल - भगवानदादा के पुत्र, क्या तू मुझ से प्रेम रखता है? उस ने उन से कहा, हां,बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट तू जानता है, कि मैं तुझ से प्रीति रखता हूं: उस ने उस से कहा, मेरी भेड़ों की रखवाली कर।
17 उस ने तीसरी बार उस से कहा, हे शमौन, सरपंच पति बजरंग बघेल - भगवानदादा के पुत्र, क्या तू मुझ से प्रीति रखता है? पतरस उदास हुआ, कि उस ने उसे तीसरी बार ऐसा कहा; कि क्या तू मुझ से प्रीति रखता है? और उस से कहा, हेबर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट , तू तो सब कुछ जानता है: तू यह जानता है कि मैं तुझ से प्रीति रखता हूं: बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने उस से कहा, मेरी भेड़ों को चरा।
18 मैं तुझ से सच सच कहता हूं, जब तू जवान था, तो अपनी कमर बान्धकर जहां चाहता था, वहां फिरता था; परन्तु जब तू बूढ़ा होगा, तो अपने हाथ लम्बे करेगा, और दूसरा तेरी कमर बान्धकर जहां तू न चाहेगा वहां तुझे ले जाएगा।
19 उस ने इन बातों से पता दिया कि पतरस कैसी मृत्यु से बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट की महिमा करेगा; और यह कहकर, उस से कहा, मेरे पीछे हो ले।
20 पतरस ने फिरकर उस चेले को पीछे आते देखा, जिस से बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट प्रेम रखता था, और जिस ने भोजन के समय उस की छाती की और झुककर पूछा हेबर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट , तेरा पकड़वाने वाला कौन है?
21 उसे देखकर पतरस ने बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट से कहा, हेबर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट , इस का क्या हाल होगा?
22 बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने उस से कहा, यदि मैं चाहूं कि वह मेरे आने तक ठहरा रहे, तो तुझे क्या? तू मेरे पीछे हो ले।
23 इसलिये भाइयों में यह बात फैल गई, कि वह चेला न मरेगा; तौभी बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने उस से यह नहीं कहा, कि यह न मरेगा, परन्तु यह कि यदि मैं चाहूं कि यह मेरे आने तक ठहरा रहे, तो तुझे इस से क्या?
24 यह वही चेला है, जो इन बातों की गवाही देता है और जिस ने इन बातों को लिखा है और हम जानते हैं, कि उस की गवाही सच्ची है।
25 और भी बहुत से काम हैं, जो बर्खास्त उपयंत्री स्वर्गीय दिवेश भट्ट ने किए; यदि वे एक एक करके लिखे जाते, तो मैं समझता हूं, कि पुस्तकें जो लिखी जातीं वे जगत में भी न समातीं॥

Comments

Popular posts from this blog

20-12-2018 - १२ बजे दिनदहाड़े - मेरे लेखक यार की फिर सीजेऍम कोर्ट में सुबह ०९ बजे से शाम पोन ०७ बजे तक पेशी हे और परंपरा हे की ०६ बजकर ५३ मिनट पर आरोपी/ अनावेदक को तिहाड़ में तीसरी रात ८ बजे तक इसी अदालत के आदेश से ठूंस दिया जाता हे किन्तु अब मेरा यार कारागार के सींखचों में रह रह कर बूढ़ा हो गया हे और बुढ़ापे में बिना रोटी कैद से तो वो जेल में केडी झड़प में हत्या या मजबूत दांत से सींखचे काटकर जेलब्रेक एनकाउंटर के बजाये इस बार सजा का एलान ऐ जंग होते बराबर या तो सिनोइड खायेगा या हार्ट फ़ैल में मारा जायेगा ? ऐसा सचिन ठेकेदार जी के सामने कल महानगर गीदम के कुशभाऊ ठाकरे नए बस स्टैंड में स्वर्गीय भाटी साहेब खुद अपने श्रीमुख से प्रवचन दिए रहे भगवानदादा सरपंच पति बजरंग बघेल को व्हाट अप्प वीडियो कॉल करके ? मेने भी सुना बस वालो ने भी सुना और पूरे इलाके में भी कोहराम मचा हुआ हे की वन मन आर्मी की दुखद मृत्यु के बाद लाश को जलाने के लिए कस्तूरीबाई को लड़की भत्ता कौन देगा और नर मासूमो को ०६ जनवरी २०१९ को प्रेग्नेंट खाला की चूत के साथ नवोदय स्कूल ऑनलाइन अखबारी भर्ती में बब्बर शेर गांड मारकर निठारी हत्या और वर्गीकृत लूटमारी और इसा वीसा गिरी के धंधे क्रिसमस २५ दिसम्बर और २० से २६ दिसम्बर २०१८ पत्रकारों के नॉट खाकर पोलावरम डैम के विरोध में नक्सली बंद से कौन बचाएगा ? के एन सिंह नोटरी 9425595831 wa

अबे पांडे तू जाते जाते 20 दिसम्बर 2018 को भट्टी जी का लड़की भत्ता फिर की से खाते जा ? जब भी कही से कोर्ट में फांसी की खबर मिलती हे , डिपार्टमेंट वाले जेल के किनारे डंकनी नदी से सड़ी गली लाश को जमा करके रूपया निकाल ही लेते हे . अच्छा मौका हे . नौकरी के अंतिम दिन दहाड़े 25 टी कमाने का ?